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Bilaspur News: तलाई सहकारी सभा के आठ ऋणियों की संपत्ति होगी अटैच

Wed, 20 Aug 2025 11:08 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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दी ग्राम सेवा सहकारी सभा तलाई में ऋण जांच मामले में कार्रवाई के दौरान मौजूद सभा सदस्य व अधिकारी
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एक्सक्लूसिव
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सात और दोषियों की फाइल संपत्ति अटैच करने के लिए उच्च अधिकारियों को भेजी
नोटिस के बाद 135 में से केवल 50 ऋण दोषी ही हुए हैं जांच में हुए शामिल
2018 में सामने आया था गबन का मामला, बनाए थे 33 करोड़ फर्जी लोन

मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर)। ग्राम सेवा सहकारी सभा तलाई में हुए करोड़ों रुपये के गबन मामले में विभाग निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सहकारी विभाग को आठ ऋण दोषियों की संपत्ति अटैच करने की मंजूरी पंजीयक सहकारी सभा के उप मंडल मंडी कार्यालय से मिल गई है। जबकि सात अन्य दोषियों की संपत्ति अटैच करने के लिए उच्च अधिकारियों से स्वीकृति मांगी गई है। अब दोषियों की चल-अचल संपत्ति भूमि राजस्व अधिनियम 1954 के तहत नीलाम कर खाताधारकों के साथ न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आठ साल के इंतजार के बाद यह लड़ाई अब निर्णायक मोड पर पहुंच चुकी है। जिससे सभा के सदस्यों को उम्मीद जगी है कि उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा। तलाई सहकारी सभा के 135 ऋण दोषियों को समन जारी कर 18 और 19 अगस्त को सहकारी सभा बरठीं में पेश होने को कहा गया था। इनमें से केवल 50 लोग ही उपस्थित हो पाए। सहायक रजिस्ट्रार ने सात अन्य दोषियों की फाइलें तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेज दी हैं। सभा में वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा वर्ष 2018 में हुआ था। किसी समय सभा में शेयर धारकों और खाताधारकों की जमा पूंजी 78 करोड़ रुपये से अधिक थी। लेकिन सभा ने इससे भी ज्यादा यानी करीब 84 करोड़ रुपये ऋण के रूप में जारी कर दिए थे, जिनकी वसूली आज तक नहीं हो पाई। सभा ने नियमों को ताक पर रखकर अमीर व्यक्तियों को बैंकों से दोगुने ब्याज पर लाभ पहुंचाया, जबकि किसानों को महंगे ब्याज पर ऋण देकर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर कर दी। जमा पूंजी पर 9 से 12 प्रतिशत ब्याज और एजेंटों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त कमीशन देकर न सिर्फ सहकारी अधिनियम का उल्लंघन किया गया, बल्कि बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की भी धज्जियां उड़ाई गईं।
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इनसेट
फर्जी नामों पर करोड़ों के लोन
ऑडिट में यह भी सामने आया था कि सभा सचिव ने लगभग 33 करोड़ रुपये ऐसे लोगों के नाम पर ऋण के रूप में जारी कर रखे थे जो क्षेत्र में मौजूद ही नहीं हैं। डाक विभाग द्वारा नोटिस भेजे जाने पर 100 से अधिक ऐसे फर्जी नाम और पते उजागर हुए, जिनके नाम पर लाखों के ऋण पास किए गए थे।
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कोट
जिला पंजीयक अधिकारी भास्कर कालिया ने बताया कि यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा सहकारी घोटाला है। कभी राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुकी यह सभा आज घोटालों की पहचान बन गई है। जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कहा कि फिलहाल ऋणियों की संपत्ति अटैच की जा रही है और जल्द ही उनकी चल-अचल संपत्ति को नीलाम कर खाताधारकों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाएगा।
संवाद
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