संस्कृति भवन में गूंजी कविता और लोकभाषा की स्वर लहरियां
-साहित्यकारों ने हास्य, प्रेम, देशभक्ति,सामाजिक सरोकारों पर सुनाईं रचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भाषा एवं संस्कृति विभाग बिलासपुर की ओर से सोमवार को संस्कृति भवन में मासिक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने की, जबकि मंच संचालन शीला सिंह ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की वंदना से हुआ।
गोष्ठी में जिले के वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। हास्य, व्यंग्य, लोकभाषा, प्रेम, प्रकृति, अध्यात्म, देशभक्ति, सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक रिश्तों जैसे विविध विषयों पर प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। रविंद्र कुमार शर्मा ने हास्य-व्यंग्य रचना प्रस्तुत करते हुए आधुनिक जीवन और बढ़ती उपभोक्तावाद की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया। उनकी पंक्तियां एक आदमी ने नया खरीदा टच स्क्रीन फोन, जिसके लिए बैंक से लिया दस हजार का लोन सुनकर सभागार ठहाकों से गूंज उठा। रविंद्र चंदेल कमल ने हिमाचल और बिलासपुर की प्राकृतिक सुंदरता का चित्रण करते हुए स्वर्ग से भी सुंदर प्रदेश हमारा, प्रदेश में अतुलनीय बिलासपुर हमारा शीर्षक से रचना प्रस्तुत की। डॉ. अनेक राम सांख्यान ने सावन ऋतु पर आधारित प्रेमगीत सुनाकर श्रोताओं को भावुक कर दिया। जीत राम सुमन ने पहाड़ी बोली में गलाई नी सक्या शीर्षक से मार्मिक रचना प्रस्तुत की, जिसकी पंक्तियां विदाई आई तां मुई इयां आई, बले अलविदा बी टैमारा बोल्ली नी सक्या ने श्रोताओं को भावुक कर दिया। बृजलाल लखनपाल ने पहाड़ी कविता बरसाती रे ध्याड़े पाणिये रे कनारे, टटीहरी टरटरहाई प्रस्तुत कर ग्रामीण जीवन और प्रकृति का सुंदर चित्र उकेरा। केशव शर्मा रसिक ने सामाजिक स्वाभिमान पर आधारित रचना शायद मुझे किसी की जी-हजूरी करनी नहीं आती सुनाई।
अमरनाथ धीमान ने ग्रामीण जीवन की सादगी और घरेलू संस्कृति को दर्शाती कविता तवे पर पकोन्दी रोटी, पतीलुए रीजदी दाल प्रस्तुत की।
कर्मवीर कंडेरा ने रंग मंच है दुनिया सारी शीर्षक से जीवन दर्शन पर आधारित कविता का पाठ किया। बीरबल धीमान ने बेटियों की उपलब्धियों को समर्पित बहारों का चमन मुस्करा गया, बेटियों को चैंपियन बना गया शीर्षक से प्रेरणादायक रचना प्रस्तुत की। बाबू राम धीमान ने पहाड़ी बोली में दुज्जया रिया छाई पर कजो, मुच्छा पल्याणियां शीर्षक से रचना सुनाई। सुषमा खजूरिया ने कारगिल युद्ध के वीर शहीदों को समर्पित भावपूर्ण कविता कारगिल शहीदों को नमन प्रस्तुत की। सुरेंद्र मिंहास ने अपने यात्रा संस्मरण स्वर्ग से सुंदर दैईया और भांगवाणी मंदिर का रोचक और विस्तृत विवेचन किया। अरुण डोगरा रितु ने पारिवारिक रिश्तों की अहमियत बताते हुए परिवार वह जगह नहीं जहां हर बात में जीतना जरूरी हो शीर्षक से रचना प्रस्तुत की। शीला सिंह ने भगवान शिव की महिमा का वर्णन करती कविता मुदित भख में बैठा शिव परिवार, तीन लोक के जो पालनहार जीवन सार का पाठ किया। सुमन चड्ढा ने कठपुतली शीर्षक से सामाजिक परिस्थितियों पर आधारित रचना प्रस्तुत की, जबकि रामपाल डोगरा ने बरसात की फुहार कविता के माध्यम से वर्षा ऋतु का मनोहारी चित्रण किया। समापन अवसर पर जिला भाषा अधिकारी नीलम चंदेल ने सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।