घुमारवीं में डस्टबिन से बनाया गया बाथरूम। संवाद
पार्कों में स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगाए गए थे डस्टबिन
डस्टबिन न होने से पार्कों में फैल रही गंदगी
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं नगर परिषद ने स्वच्छता को बढ़ावा देने और सार्वजनिक स्थलों की सुंदरता बनाए रखने के लिए जो डस्टबिन लगाए थे वो अब प्रवासियों के बाथरूम बन गए हैं। हजारों रुपये की लागत से रैन बसेरा के समीप पार्क में यह विशेष जालीदार डस्टबिन लगाए गए थे।
इन डस्टबिनों का उद्देश्य था कि लोग पार्क में प्लास्टिक की खाली बोतलें और अन्य कचरा यहां डालें ताकि पार्क स्वच्छ और आकर्षक बना रहे, लेकिन यह डस्टबिन ही गायब हैं। यह न केवल नगर परिषद की लापरवाही को उजागर करती है बल्कि प्रबंधन पर भी सवाल खड़े करती है। जानकारी के अनुसार यह डस्टबिन आज प्रवासी लोगों के लिए बाथरूम बनकर रह गए हैं। हालात इतने खराब हैं कि पार्क में लगाए गए यह डस्टबिन अब वहां मौजूद ही नहीं हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, पार्क के किनारे अस्थायी झुग्गियों में रहने वाले प्रवासी मजदूर इन डस्टबिनों को उठाकर अपने रहने के स्थानों तक ले गए हैं। वहां इन डस्टबिनों को कपड़े से ढक कर बाथरूम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह न केवल स्वच्छता अभियान की अवहेलना है, बल्कि सार्वजनिक संपत्ति के दुरुपयोग का भी है। हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद को अब तक इस पूरे मामले की भनक तक नहीं है। लोगों का कहना है कि इन डस्टबिनों की नियमित निगरानी नहीं की जा रही थी, न ही इनके रख-रखाव पर ध्यान दिया गया। धीरे-धीरे पार्क में लगे सभी डस्टबिन गायब होते गए। आलम यह है कि पार्क में कूड़ा फेंकने की कोई सुविधा नहीं है और लोग मजबूरी में इधर-उधर कचरा फेंकने लगे हैं, जिससे पार्क की सुंदरता और स्वच्छता दोनों प्रभावित हो रही हैं। यह घटना नगर परिषद की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करती है। करोड़ों के बजट खर्च करने वाले विभाग को यह तक नहीं पता कि उनकी संपत्ति का क्या हो रहा है।
नगर परिषद घुमारवीं के कार्यकारी अधिकारी खेमचंद वर्मा ने बताया कि शहर में जितने भी डस्टबिन लगे थे वह सभी उठा लिए गए थे, क्योंकि लोगों द्वारा डस्टबिन के बाहर ही कूड़े के ढेर लगने शुरू कर दिए गए थे। डस्टबिन के भर जाने के बाद उन्हें खाली करना भी आसान नहीं था। जो भी डस्टबिन हटाए गए हैं उन्हें स्टोर में रखा गया है। अगर कोई डस्टबिन गायब है तो उसका पता लगाया जाएगा।