अभियान बहदाल सड़कें -2
तरघेल के पास आपदा में क्षतिग्रस्त मार्ग बना खतरा
शिकायत के बाद भी विभाग की अनदेखी पर उठे सवाल
भारी बारिश और भूस्खलन से दो साल पहले धंसा था हाईवे का हिस्सा
संकरी सड़क पर बड़े वाहनों की आवाजाही बनी जोखिम भरी
चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा दीवार और बेरिकेड्स का भी है अभाव
नीरज महाजन
भराड़ी (बिलासपुर)। शिमला-मटौर नेशनल हाईवे पर तरघेल कस्बे के पास करीब दो वर्ष पहले आपदा के कारण ढही सड़क की आज तक स्थायी मरम्मत नहीं हो पाई है। लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी इस सड़क के कारण क्षेत्र से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
लगभग दो वर्ष पहले भारी बारिश और भूस्खलन के कारण हाईवे का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। उस दौरान सड़क का किनारा धंस गया और मार्ग काफी संकरा हो गया। प्रारंभिक स्तर पर कुछ अस्थायी प्रबंध किए गए, लेकिन स्थायी मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका। परिणामस्वरूप आज भी यह मार्ग खतरे से खाली नहीं है। यह मार्ग शिमला और कांगड़ा क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, जिस पर रोजाना सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। निजी वाहन, बसें, ट्रक और आवश्यक वस्तुओं से लदे वाहन इसी रास्ते से आवाजाही करते हैं। यातायात का दबाव लगातार बना रहने के बावजूद सड़क की जर्जर हालत को नजरअंदाज किया जा रहा है। सड़क के किनारों पर गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और कई स्थानों पर मिट्टी लगातार खिसक रही है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। पानी के बहाव के कारण क्षतिग्रस्त हिस्सा और कमजोर हो जाता है, जिससे कभी भी बड़ा हिस्सा धंसने का खतरा बना रहता है। वाहन चालकों के अनुसार तरघेल के पास सड़क इतनी संकरी हो गई है कि बड़े वाहनों की पासिंग के दौरान विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। कई बार एक वाहन को रुककर दूसरे को निकलने देना पड़ता है। रात के समय या घने कोहरे और बारिश के दौरान यहां से गुजरना बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है। अचानक ब्रेक लगाने या वाहन पीछे करने की स्थिति में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है, जिससे जाम की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है।
लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। कई स्थानों पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही मजबूत सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया है। सड़क किनारे बेरिकेड्स की व्यवस्था भी नहीं है, जिससे वाहन सीधे ढही हुई ढलान की ओर जा सकते हैं। दो वर्ष बीत जाने के बावजूद स्थायी समाधान न होना कई सवाल खड़े करता है। क्या विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है या फिर इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं है। संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द तकनीकी निरीक्षण कराकर सड़क की स्थायी मरम्मत करवाई जाए और मजबूत सुरक्षा प्रबंध किए जाएं। वाहन चालकों का कहना है कि नेशनल हाईवे होने के बावजूद इस प्रकार की अनदेखी चिंताजनक है। संवाद
इनसेट
दो साल से सड़क की हालत जस की तस बनी हुई है। हर दिन डर के साये में यहां से गुजरना पड़ता है। अगर समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। - पवनीश गर्ग, स्थानीय निवासी
इनसेट
तरघेल के पास सड़क इतनी संकरी हो गई है कि बड़े वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है। सामने से वाहन आ जाए तो कई बार गाड़ी पीछे करनी पड़ती है। रात के समय तो और ज्यादा खतरा रहता है। - सुखदेव, वाहन चालक
इनसेट
बरसात में मिट्टी लगातार खिसकती रहती है। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर आना-जाना बहुत मुश्किल हो जाता है। न कोई चेतावनी बोर्ड है और न ही सुरक्षा दीवार।
अरविंद कुमार, ग्रामीण
इनसेट
यह नेशनल हाईवे है, लेकिन हालत गांव की कच्ची सड़क जैसी हो गई है। रोज सैकड़ों लोग सफर करते हैं, फिर भी विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। जल्द मरम्मत जरूरी है। - डॉ. राहुल पटियाल, स्थानीय निवासी
ग्राउंड रिपोर्ट का पक्ष
एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी ने कहा कि मामले को लेकर संबंधित विभाग से बात की जाएगी। जल्द ही इस सड़क की मरम्मत कराई जाएगी।
तरघेल के पास धंसा शिमला.मटौर हाईवे। दो साल से नहीं हुई मरम्मत। संवाद
तरघेल के पास धंसा शिमला.मटौर हाईवे। दो साल से नहीं हुई मरम्मत। संवाद
तरघेल के पास धंसा शिमला.मटौर हाईवे। दो साल से नहीं हुई मरम्मत। संवाद
तरघेल के पास धंसा शिमला.मटौर हाईवे। दो साल से नहीं हुई मरम्मत। संवाद