बाहरी राज्यों से जाल में फंसा कर लाए जा रहे मजदूरों को नहीं मिल रहा उनका हक
प्रवासी ठेकेदार ही मजदूर रखवाने की एवज में ले रहे कमीशन
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं(बिलासपुर)। घुमारवीं क्षेत्र में पिछले लंबे समय से मजदूरों के शोषण और मानव तस्करी का काला धंधा चल रहा है। प्रवासी ठेकेदार पश्चिम बंगाल, झारखंड, असम और उड़ीसा से गरीब मजदूरों को अपने जाल में फंसा कर यहां लाते हैं। दुकानदारों और घरों में काम दिलाने के नाम पर उनका सौदा किया जाता है और मोटा कमीशन वसूला जाता है।
सूत्रों के अनुसार ठेकेदार एक मजदूर को काम पर रखवाने की एवज में मालिक से 20 से 25 हजार रुपये तक कमीशन वसूलते हैं। इसके बाद मजदूरों की मासिक तनख्वाह मात्र 6 से 8 हजार रुपये तय की जाती है। समझौता यह भी होता है कि पहले तीन महीने तक मजदूरों को कोई वेतन नहीं मिलेगा, ताकि मालिक ठेकेदार को दिए गए पैसे की रिकवरी कर सके।
दुखद यह है कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी मजदूरों को वेतन नसीब नहीं होता। मालिक उन्हें यह कहकर टाल देते हैं कि उनके पैसे खाते में डाल दिए गए हैं, जबकि मजदूरों को यह तक नहीं मालूम होता कि उनके नाम पर किस बैंक में खाता खोला गया है। इसी काले खेल की शिकार एक महिला मजदूर ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह और उसका पति एक होटल में बीते छह महीने से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक एक पैसा हाथ में नहीं आया। उन्हें रोजाना सिर्फ दाल-चावल ही खाने को दिया जाता है, वह भी भरपेट नहीं। चाय पीने का मन हो तो बिना दूध की चाय नसीब होती है। महिला ने बताया कि उसे झारखंड का एक ठेकेदार यहां काम दिलवाकर चला गया था। उसने वादा किया था कि हर महीने 10 हजार रुपये वेतन मिलेगा, लेकिन आज तक एक भी रुपया नहीं मिला। महिला का कहना है कि उनके घर वालों से भी कोई बात नहीं हो पाती। बस कभी-कभार एक पड़ोसी के नंबर पर फोन करके हालचाल ले पाते हैं। इस पूरे मामले में साथ लगते जिले के एक व्यक्ति और झारखंड निवासी ठेकेदार का नाम सामने आया है, जो क्षेत्र के अंदर ही ऑफिस खोलकर मजदूरों का सौदा करता है। यह अकसर बाहर से मजदूर लाकर यहां बेच देता है और मोटा कमीशन लेकर गायब हो जाता है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला अब मानव तस्करी का रूप ले चुका है। गरीब मजदूरों को खरीदकर यहां लाकर गुलामों की तरह काम करवाया जा रहा है। मजदूरों को न तो उनका हक मिल रहा है, न ही इंसानियत के मुताबिक व्यवहार। चिंताजनक यह है कि यह धंधा लंबे समय से क्षेत्र में फल-फूल रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कोट
मजदूरों के शोषण संबंधी ऐसी कोई शिकायत विभाग के पास नहीं आई है। विभाग समय-समय पर जांच करता है और आवश्यक कार्रवाई करता है। लेकिन अब मामला संज्ञान में आया है तो इस मामले में भी विभाग जल्द ही कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
सुभाष शर्मा, श्रम निरीक्षक, श्रम एवं रोजगार विभाग बिलासपुर