सदर से रोहित ठाकुर, जांगला से देवांश चंदेल पर चला अनुशासन का डंडा
जिला परिषद चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ लड़ रहे चुनाव
दोनों को दायित्वों से मुक्त कर भाजपा ने बागियों को दिया संदेश
बरमाणा और जांगला वार्ड में दिलचस्प हुआ मुकाबला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पंचायत चुनाव के बीच बिलासपुर भाजपा में चल रही खींचतान पर आखिरकार संगठन ने सख्त रुख अपनाया है। लंबे समय से चर्चा में चल रही बरमाणा और जांगला जिला परिषद वार्ड की बगावत पर कार्रवाई करते हुए भाजपा ने बिलासपुर सदर से जुड़े रोहित ठाकुर और भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष देवांश चंदेल को उनके संगठनात्मक दायित्वों से मुक्त कर दिया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल की अनुमति के बाद यह सूची जारी की गई।
इस कार्रवाई के बाद जिले की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। अब तक भाजपा संगठन की चुप्पी को लेकर सवाल उठ रहे थे, क्योंकि अन्य जिलों में पार्टी पहले ही बागियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी थी। अब बिलासपुर में कार्रवाई के बाद पार्टी ने साफ संकेत दिया कि अनुशासनहीनता को लेकर वह नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं है। बरमाणा जिला परिषद वार्ड में भाजपा ने अशोक कुमार को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है, जबकि रोहित ठाकुर बागी होकर मैदान में उतर चुके हैं। यह क्षेत्र सदर विधायक त्रिलोक जमवाल का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में संगठनात्मक कार्रवाई के बाद अब पूरी नजर इस बात पर टिक गई है कि भाजपा का पारंपरिक वोट कितना अधिकृत उम्मीदवार के साथ मजबूती से खड़ा रहता है और कितना बागी उम्मीदवार की ओर जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कार्रवाई के बाद भाजपा समर्थक मतदाताओं के बीच यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी अधिकृत प्रत्याशी के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। हालांकि दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि यदि बागी उम्मीदवार चुनाव मैदान में डटे रहते हैं तो मुकाबला अब भी त्रिकोणीय और बेहद रोचक बना रहेगा। वहीं जांगला जिला परिषद वार्ड में भाजयुमो प्रदेश उपाध्यक्ष रहे देवांश चंदेल की बगावत पहले से ही चर्चा का विषय बनी हुई थी। भाजपा ने यहां अनूप महाजन को उम्मीदवार बनाया है। देवांश चंदेल निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। अब संगठनात्मक कार्रवाई के बाद चुनाव और प्रतिष्ठा का विषय बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा की इस कार्रवाई का सीधा असर चुनावी माहौल पर दिखाई देगा। एक तरफ संगठन अपने अधिकृत उम्मीदवारों के पक्ष में कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की कोशिश करेगा, वहीं दूसरी ओर बागी उम्मीदवार भी अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में पीछे नहीं हटेंगे। ऐसे में बरमाणा और जांगला दोनों सीटें अब जिले की सबसे हाई प्रोफाइल राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो चुकी हैं।