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तकनीक: एम्स बिलासपुर में नकली आंखों पर सर्जरी का अभ्यास करेंगे डॉक्टर, जानें विस्तार से

Sun, 15 Feb 2026 12:39 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

एम्स बिलासपुर में एक आधुनिक वेट-लैब स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इस लैब में डॉक्टर ऑपरेशन करने से पहले रेटी-आई जैसी कृत्रिम आंखों पर अभ्यास करेंगे। जानें विस्तार से...
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एम्स बिलासपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के नेत्र विज्ञान विभाग में उपचार की तकनीक और हाईटेक होने जा रही है। एम्स प्रशासन ने अस्पताल में एक आधुनिक वेट-लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस लैब की खासियत यह होगी कि यहां डॉक्टर असली मरीज की आंख का ऑपरेशन करने से पहले रेटी-आई जैसी कृत्रिम आंखों पर घंटों पसीना बहाएंगे।

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इस नई व्यवस्था से न केवल डॉक्टरों के हाथ सधेंगे, बल्कि मरीजों की आंखों की रोशनी और भी सुरक्षित होगी। एम्स ने इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरणों और किट्स की खरीद के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, यह लैब नेत्र विशेषज्ञों और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए एक ट्रेनिंग ग्राउंड की तरह काम करेगी। यहां वे मोतियाबिंद और पर्दे की जटिल सर्जरी का अभ्यास असली जैसे दिखने वाले आई-मॉडल्स पर कर सकेंगे। आंखों का पर्दा (रेटिना) शरीर का बेहद नाजुक हिस्सा होता है। रेटी-आई मॉडल में लगी माइक्रो-फिल्म्स पर लेजर प्रैक्टिस करने से डॉक्टरों की सटीकता 100 फीसदी तक बढ़ जाएगी। इससे असली सर्जरी के दौरान गलती की गुंजाइश जीरो रहेगी। 

एम्स जो नए सर्जिकल सेट और आई-बॉल स्टैंड मंगवा रहा है, वे उच्च श्रेणी के स्टेनलेस स्टील से निर्मित हैं। इन्हें ऑटोक्लेव (उच्च तापमान पर कीटाणुशोधन) किया जा सकता है, जिससे मरीजों में ऑपरेशन के बाद इंफेक्शन का खतरा कम होगा। जो सुविधाएं पहले केवल पीजीआई चंडीगढ़ या दिल्ली के बड़े अस्पतालों में थीं, वे अब बिलासपुर में मिलेंगी। जटिल मोतियाबिंद और पर्दे के फटने जैसी समस्याओं का इलाज अब एम्स में ही पूरी सुरक्षा के साथ होगा।

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क्या है रेटी-आई तकनीक और अन्य उपकरण
यह एक विशेष मेडिकल किट है, जिसमें इंसानी आंख का बिल्कुल सटीक मॉडल होता है। इसमें 6 एमएम की पुतली और बदली जा सकने वाली रेटिना फिल्म्स होती हैं। इसके अलावा आई फिक्सेशन हेड और कैटरेक्ट सेट्स भी मंगाए जा रहे हैं। इन उपकरणों की मदद से डॉक्टर टांके लगाने, लेंस डालने और रेटिना लेजर करने की बारीकियां सीखेंगे। विभाग का लक्ष्य है कि मार्च के अंत तक इस लैब को सुचारु रूप से शुरू कर दिया जाए।
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