वर्षों से सरकार और विभागीय अनदेखी का दंश झेल रहे हजारों प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। टीजीटी शिक्षकों ने दूसरे संगठनों को अनापशनाप की बयानबाजी न करने और आंकड़ों को तोड़मरोड़ कर पेश न करने की सलाह दी है।
प्रदेश प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक संघ के पदाधिकारी प्रदेश वरिष्ठ उपप्रधान किशोर वर्मा, उपप्रधान मदन ठाकुर, लायक राम, महासचिव सुरेश कौशल, महिला विंग की चेयरपर्सन अंजुम जसरोटिया, जिला बिलासपुर प्रधान दिग्विजय, हमीरपुर के बलदेव कल्सी, ऊना से संजीव राजन, कुल्लू से शेर सिंह ने प्रेस को जारी एक संयुक्त बयान में कहा कि प्रदेश भर में 25676 टीजीटी शिक्षकों का एक बहुत बड़ा कॉडर है, जबकि उस में से केवल प्रशिक्षित स्नातक अध्यापकों में से 739 मुख्यध्यापक ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के अनुसार प्रधानाचार्य पदों के लिए लेक्चरर और मुख्याध्यापक वर्ग में से 50-50 प्रतिशत के अनुपात में पदोन्नतियों होती हैं। उन्होंने कहा कि टीजीटी वर्ग के इतने बड़े विशाल कॉडर को देखते पदोन्नति का यह कोटा बढ़ाकर 90 प्रतिशत प्रशिक्षित स्नातक अध्यापकों के लिए और 10 प्रतिशत लेक्चरर के लिए निश्चित किया जाना चाहिए।
क्योंकि प्रदेश भर में लेक्चरर की संख्या का आंकड़ा करीब 4 हजार से भी कम है। उन्होंने कहा कि पहले यह कोटा 60 और 40 के अनुपात में होता था, जबकि विभाग के सामने गलत आंकड़े प्रस्तुत करके उनके इस कोटे पर कैंची चलाई गई है जोकि टीजीटी वर्ग को कतई सहन नहीं है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में विभाग को चेताते हुए कहा कि इस तरह का षड्यंत्र अगर दोबारा रचा गया तो टीजीटी वर्ग उनकी इस अनदेखी को सहन नहीं करेगा। उधर, प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक प्रदेशाध्यक्ष सुरेश पन्याली ने कहा कि शिक्षा विभाग और सरकार को इस वर्ग से हो रहे अन्याय के बारे में सोचना होगा। क्योंकि 1987 का टीजीटी अभी तक भी प्रधानाचार्य नहीं बन पाया है।