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तर्कसंगत नहीं 35 मिनट का पीरियड

Sat, 05 Dec 2015 07:43 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, बिलासपुर
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हिमाचल प्रदेश पदोन्नत प्राध्यापक संघ की बैठक शनिवार को उपनिदेशक उच्च शिक्षा बिलासपुर रवि जमवाल की अध्यक्षता में हुई। इसमें संघ के प्रदेश कार्यकारी एवं जिला प्रधान अमरनाथ धीमान ने संघ की विभिन्न मांगों को उपनिदेशक के समक्ष रखा।
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उन्होंने पीरियड बदलाव का विरोध करते हुए उसे पूर्ववत रखने की पुरजोर मांग को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि 35 मिनट का पीरियड 11वीं और 12 वीं कक्षा के विद्यार्थियों के हित में तर्कसंगत नहीं है।

उन्होंने कहा कि नव स्तरोन्नत पाठशालाओं में सभी विषयों के पद सृजित किए जाएं तथा एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों का मासिक मानदेय एक हजार रुपये किया जाए। संघ के महासचिव विक्रम शर्मा ने कहा कि 4-9-14 के मामलों से संबंधित वित्त 9 जुलाई, 2014 को जारी किया गया है, जो कि पूरे प्रदेश के कर्मचारियों के हितों पर कुठाराघात है। इसका संघ विरोध करता है।
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उन्होंने मांग की है कि इसे तुंरत निरस्त किया जाए, अन्यथा संघ कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य होगा। बैठक में संघ के वरिष्ठ उपप्रधान संजीव शर्मा, उपप्रधान नंदलाल शर्मा, प्रदेश सचिव राजकुमार शर्मा, परसराम लोहिया, प्रवीण चंदेल, रमेश सांख्यान, सोहन लाल शर्मा, शीला धीमान, रणजीत गौतम, देसराज शर्मा, संजीव राव, पवन कुमार, जगदीश कुमार, ज्ञान चंद, सुरेश शर्मा, मधु महाजन, रामचंद शर्मा, बंशी राम व राजेंद्र चौधरी आदि उपस्थित रहे।

पीजीटी को दिया जाए प्रवक्ता पदनाम
बैठक में संघ ने मांग उठाई कि पीजीटी को प्रवक्ता पदनाम दिया जाए, ऑप्शन की शर्त को हटाया जाए, 4-9-14 के लंबित मामलों को तत्काल निपटाया जाए और प्रधानाचार्य, मुख्याध्यापक एवं प्रवक्ताओं के रिक्त पदों को पदोन्नति द्वारा जल्द भरा जाए।

इसके अलावा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए गैर शिक्षक कार्यों पर पूर्व प्रतिबंध लगाया जाए, स्वच्छता अभियान की सफलता के लिए प्रत्येक स्कूल में दो सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए और पंजाब की तर्ज पर देय सभी भत्ते दिए जाएं।

समयबद्ध हों कार्यशालाएं और सेमिनार
संघ ने सभी प्राध्यापकों और अध्यापकों की कार्यशालाएं, खेलों के कार्यक्रम और अन्य प्रशिक्षण एवं सेमिनार एक निर्धारित कलेंडर के अनुसार समयबद्ध आयोजित करने की मांग की है।

इसके अतिरिक्त कलेंडर जारी करने से पूर्व पदोन्नत प्राध्यापक संघ के पदाधिकारियों को विश्वास में लेने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया गया। साथ ही बच्चों की पढ़ाई के मद्देनजर रिक्त लिपिक, वरिष्ठ सहायक पदों को भरने की वकालत भी की गई। क्योंकि लिपिक के कार्य को विभिन्न स्कूलों में प्राध्यापकों और अध्यापकों द्वारा करवाया जा रहा है।
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