बिलासपुर। उद्योग विभाग के रैंप कार्यक्रम के तहत घुमारवीं में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, जेम एवं सीपीपी पोर्टल विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में जिलेभर से 70 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने भाग लिया और डिजिटल तकनीकों तथा सरकारी खरीद प्रणाली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उद्योग केंद्र बिलासपुर के महाप्रबंधक मनोज कुमार और उद्योग संघ के अध्यक्ष प्रेम डोगरा ने की। कार्यशाला का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा देना तथा सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में स्थानीय उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाना रहा। कार्यशाला के पहले तकनीकी सत्र में प्रशिक्षक कोविद शर्मा ने उद्योग 4.0 की अवधारणा पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ऑटोमेशन, डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्ता सुधार और लागत कम करने जैसे विषयों को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ समझाया।
उन्होंने कहा कि कम लागत में आधुनिक तकनीक अपनाकर एमएसएमई अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। दूसरे सत्र में जेम विशेषज्ञ संजय शर्मा और अविनाश शर्मा ने जेम पोर्टल पर पंजीकरण, ऑनबोर्डिंग, ई-बोली प्रक्रिया, आवश्यक अनुपालन, एमएसएमई के लिए उपलब्ध विशेष प्रावधान, भुगतान व्यवस्था और सरकारी खरीद के अवसरों की जानकारी दी। उद्योग विभाग के जेम विशेषज्ञ अमित कुमार ने मौके पर कई उद्यमियों का जेम पोर्टल पर पंजीकरण भी कराया।
महाप्रबंधक मनोज कुमार ने कहा कि सभी एमएसएमई इकाइयों को जेम पोर्टल पर पंजीकरण कराना चाहिए, क्योंकि सरकार अपनी अधिकांश खरीद इसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से करती है। इससे उद्यमियों को बड़ा बाजार मिलने के साथ समय पर भुगतान भी सुनिश्चित होता है। उद्योग संघ के अध्यक्ष प्रेम डोगरा ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं उद्यमियों को नई तकनीकों और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संवाद