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Bilaspur News: सड़क किनारे खड़ी कार का अचानक दरवाजा खोलना पड़ा भारी

Sat, 28 Feb 2026 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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अदालत से -
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मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण घुमारवीं ने ठोका 2.81 लाख का मुआवजा
ड्राइवर की मौत, बिना रिन्यू लाइसेंस के बावजूद पीड़ित शिक्षक को मिला न्याय
कहा- किसी के लिए जानलेवा हो सकती है सार्वजनिक मार्ग पर वाहन चालक की छोटी सी लापरवाही

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सड़क किनारे गाड़ी खड़ी कर बिना पीछे देखे अचानक दरवाजा खोलना न केवल जानलेवा हो सकता है, बल्कि कानूनी रूप से भी बेहद महंगा साबित हो सकता है। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण घुमारवीं के पीठासीन अधिकारी डॉ. मोहित बंसल की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पीड़ित बाइक सवार को 2,80,686 का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है।
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अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मार्ग पर वाहन चालक की एक छोटी सी लापरवाही दूसरे व्यक्ति के लिए भारी क्षति का कारण बन सकती है। मामला 6 अक्टूबर 2017 का है। याचिकाकर्ता जो निजी स्कूल में शिक्षक हैं, अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर स्कूल से घर लौट रहे थे। दोपहर करीब 3:30 बजे जब वह पडयालग गोशाला के पास पहुंचे, तो वहां सड़क किनारे एक कार खड़ी थी। जैसे ही वो कार के पास से गुजरने लगे, कार की चालक सीट पर बैठे व्यक्ति ने अचानक बिना पीछे देखे दरवाजा खोल दिया। दरवाजा सीधे बाइक से टकराया, जिससे बाइक सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले पीएचसी पडयालग ले जाया गया, जहां से उन्हें जोनल अस्पताल हमीरपुर रेफर किया गया। वहां उनका ऑपरेशन हुआ और वे 18 दिन तक अस्पताल में भर्ती रहे। हादसे के बाद थाना भराड़ी में एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी ड्राइवर के खिलाफ चालान पेश किया था। कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से चश्मदीद गवाह ने हादसे की पुष्टि की। वहीं, डॉक्टर ने पीड़ित की 23 फीसदी दिव्यांगता की पुष्टि की। अन्य गवाहों ने टैक्सी खर्च और देखभाल के खर्चों के प्रमाण दिए। सुनवाई के दौरान सामने आया कि आरोपी की मृत्यु हो चुकी है, जिससे आपराधिक मामला खत्म हो गया था। वहीं इंश्योरेंस कंपनी ने दलील दी कि ड्राइवर का लाइसेंस रिन्यू नहीं था। न्यायाधीश ने बीमा कंपनी की दलील को खारिज करते हुए एक ऐतिहासिक व्यवस्था दी। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना के समय कार चल नहीं रही थी, बल्कि खड़ी स्थिति में दरवाजा खोलने से हादसा हुआ, इसलिए ड्राइविंग लाइसेंस का रिन्यू न होना मुआवजे से बचने का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने आदेश दिया कि वाहन के मालिक की ओर से बीमा कंपनी यह राशि याचिका दायर करने की तिथि से लेकर भुगतान होने तक 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पीड़ित को अदा करे।
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