घुमारवीं बाजार में यातायात का दबाव। संवाद
महंगाई, ऑनलाइन बाजार, पार्किंग अव्यवस्था ने तोड़ी छोटे शहर के दुकानदारों की कमर
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं जैसे छोटे शहर का बाजार कभी पूरे जिले में अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था, लेकिन आज वही बाजार गंभीर संकट से गुजर रहा है। बीते कुछ समय से शहर के छोटे दुकानदार लगातार कारोबार में गिरावट झेल रहे हैं। हालात यह हैं कि सुबह से शाम तक दुकानें खुली रहती हैं, लेकिन ग्राहकों की आवाजाही उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पा रही। बाजार में पहले जैसी चहल-पहल अब केवल त्योहारों तक सिमट कर रह गई है।
दुकानदारों के अनुसार महंगाई ने सबसे पहले छोटे व्यापार की कमर तोड़ी है। थोक बाजारों से आने वाला सामान पहले की तुलना में कहीं अधिक महंगा हो गया है, जबकि ग्राहक बढ़े हुए दाम चुकाने से कतराता है। नतीजतन मुनाफा लगातार घट रहा है और कई दुकानों का खर्चा निकालना भी मुश्किल होता जा रहा है। किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का वेतन अब छोटे दुकानदारों के लिए भारी बोझ बन चुका है। ऑनलाइन खरीदारी ने भी घुमारवीं के पारंपरिक बाजार को गहरा झटका दिया है। रेडीमेड कपड़े, मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते और कॉस्मेटिक जैसे कारोबार सीधे तौर पर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की मार झेल रहे हैं। बड़े डिस्काउंट और होम डिलीवरी के चलते ग्राहक स्थानीय दुकानों से दूरी बना रहा है। इसका सबसे अधिक असर उन दुकानदारों पर पड़ रहा है, जो सीमित पूंजी और सीमित संसाधनों के सहारे वर्षों से अपना कारोबार चला रहे थे। स्थिति को और बिगाड़ने का काम शहर की अव्यवस्थित ट्रैफिक व्यवस्था और पार्किंग की समस्या कर रही है। बाजार क्षेत्र में वाहन खड़ा करने की उचित व्यवस्था न होने के कारण ग्राहक जल्दी रुकने से बचता है। कई दुकानदारों का कहना है कि लोग अब बाजार आने के बजाय बड़े शहरों या ऑनलाइन विकल्पों को प्राथमिकता देने लगे हैं। छोटे व्यापारियों का मानना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो घुमारवीं जैसे छोटे शहरों का पारंपरिक बाजार के अस्तित्व पर संकट में आ सकता है। व्यापारी वर्ग प्रशासन से बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, स्थायी पार्किंग व्यवस्था, स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने वाली नीतियों और छोटे दुकानदारों के लिए राहत उपायों की मांग कर रहा है। व्यापार मंडल घुमारवीं के प्रधान हेमराज संख्यान ने कहा कि छोटे दुकानदार अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। महंगाई, ऑनलाइन प्रतिस्पर्धा और अव्यवस्थित पार्किंग ने कारोबार चौपट कर दिया है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते घुमारवीं का बाजार दम तोड़ रहा है। यदि शीघ्र स्थायी पार्किंग, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन और स्थानीय व्यापार संरक्षण की नीति नहीं बनी, तो पारंपरिक बाजार का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
घुमारवीं बाजार में यातायात का दबाव। संवाद