रणसल में आयोजित श्रीमद भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। संवाद
-रणसल गांव में चल रहा था सात दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान
संवाद न्यूज एजेंसी
भगेड़ (बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल की लद्दा पंचायत के अंतर्गत रणसल गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का समापन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। इस दौरा भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चारण और जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
कथा व्यास पंडित सुरजीत शर्मा ने कहा कि भगवद् गीता में मनुष्य योनि को समस्त योनियों में श्रेष्ठ बताया गया है, क्योंकि मनुष्य को ही ईश्वर भक्ति, सत्कर्म और आत्मचिंतन का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य सांसारिक मोह-माया और भौतिक सुखों के पीछे भागते हुए भक्ति मार्ग से दूर होता जा रहा है, जिससे जीवन में अशांति और दुख बढ़ रहे हैं। श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए भगवान का स्मरण, सत्संग और सेवा भाव को अपनाना आवश्यक है। प्रवचनों के दौरान पंडित शर्मा ने बताया कि श्रीमद् भागवत महापुराण को सभी पुराणों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। इसमें भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश का विस्तारपूर्वक वर्णन मिलता है।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं, भक्त प्रहलाद की अटूट श्रद्धा, ध्रुव की तपस्या तथा राजा परीक्षित और शुकदेव मुनि के संवाद के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि कलयुग में भगवान के नाम का स्मरण और कीर्तन ही मोक्ष प्राप्ति का सरल मार्ग है। कथा के अंतिम दिन विधिवत पूजा-अर्चना और हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूर्ण आहुतियां डालकर विश्व कल्याण, सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। इसके उपरांत कथा का विधिवत समापन कर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। आयोजक समिति ने कथा व्यास का सम्मान करते हुए सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।