-विद्यार्थियों ने किया गीता के प्रथम एवं द्वितीय अध्याय के श्लोकों के गायन का अभ्यास
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। श्री रामानुज संस्कृत महाविद्यालय पंजगाई में आयोजित कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यार्थियों को गीता के प्रथम एवं द्वितीय अध्याय के श्लोकों के गायन एवं उच्चारण का अभ्यास करवाया गया। श्रीमद्भगवदगीता के श्लोकोच्चारण प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से किया गया।
कार्यशाला में संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य आचार्य श्यामलाल शर्मा ने गीता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवदगीता प्रत्येक स्थिति में जीवनभर मनुष्य का मार्ग प्रशस्त करती है। मनुष्य के जीवन में आने वाले प्रत्येक पड़ाव चाहे वह मानसिक, शारीरिक, सामाजिक, व्यापारिक, सुख-दुख हो इत्यादि में श्रीमदभगवद्गीता ही मनुष्य को शांति प्रदान करती है। श्रीमद्भगवद्गीता का शाश्वत ज्ञान अखंड है। श्रीमद्भगवद्गीता का महत्व संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रासंगिक है। प्रशिक्षक डॉ. मनोज शैल ने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता ही एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें सृष्टि के संपूर्ण आध्यात्मिक पक्षों का समावेश है। इनको पूर्ण रूप से समझ लेने पर भारतीय चिंतन का समस्त सार ज्ञात हो सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता सभी के लिए आवश्यक है। समारोह में महाविद्यालय के छात्रों को सात समूहों में विभाजित किया गया। इनकी सोमवार को प्रतियोगिता करवाई जाएगी। प्रतियोगिता में पांच छात्रों का चयन राज्य स्तरीय महाविद्यालय प्रतियोगिता के लिए किया जाएगा। यह प्रतियोगिता भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा हमीरपुर में आयोजित की जाएगी। कार्यशाला का समापन सोमवार को होगा। इसमें बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। कार्यशाला के समापन समारोह में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय अमृतसर के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. लेखराम शर्मा और जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी उपस्थित होंगी।