कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में अवैध निर्माण पर प्रशासन सख्त
मुआवजा मिलने के बावजूद आरओडब्ल्यू में बना शौचालय
संयुक्त निरीक्षण में हुआ खुलासा, मुआवजा आवंटन के बाद भी नहीं छोड़ा कब्जा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के बाद भी मौके पर बने अवैध निर्माण को लेकर घुमारवीं प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। एसडीएम घुमारवीं गौरव चौधरी ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक और भू-अर्जन अधिकारी, बिलासपुर को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फोरलेन के राइट ऑफ वे के भीतर पाए गए अवैध निर्माण को शीघ्र हटाना सुनिश्चित किया जाए, ताकि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना में किसी भी प्रकार की बाधा न आए।
इस प्रकरण की शुरुआत एक शिकायत से हुई। शिकायत थी कि मौजा रोहिण में एक मकान व उससे संबंधित शौचालय फोरलेन परियोजना में अधिग्रहित भूमि के भीतर आता है। इसके बावजूद मुआवजा आवंटन के बाद भी उक्त निर्माण को नहीं हटाया गया, जिससे फोरलेन प्रभावित हो रहा है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम गौरव चौधरी ने 17 नवंबर 2025 को तहसीलदार घुमारवीं को निर्देश दिए थे कि संबंधित विभागों के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मौके पर संयुक्त निरीक्षण किया जाए। तय कार्यक्रम के अनुसार तहसीलदार घुमारवीं की अध्यक्षता में राजस्व विभाग सहित संबंधित विभागों की टीम ने स्थल का निरीक्षण किया और मौके की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।
संयुक्त निरीक्षण के बाद राजस्व विभाग के क्षेत्रीय अमले की ओर से रिपोर्ट तैयार की गई। स्पष्ट हुआ कि मौजा रोहिण में स्थित भूमि खसरा नंबर 1181/822/567, रकबा 10-6, कीरतपुर–नेरचौक फोरलेन परियोजना के लिए विधिवत रूप से अधिग्रहित की जा चुकी है। पैमाइश के दौरान यह तथ्य सामने आया कि मकान का शौचालय आंशिक रूप से फोरलेन के राइट ऑफ वे के भीतर स्थित है, जो कि राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों एवं अधिग्रहण नियमों का उल्लंघन है। इन तथ्यों के आधार पर एसडीएम घुमारवीं ने एनएचएआई को निर्देश दिए हैं कि संयुक्त निरीक्षण में पाए गए अवैध निर्माण को बिना किसी देरी के हटाया जाए। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र में दर्ज सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करते हुए संबंधित विभाग अपनी स्पष्ट टिप्पणी सहित विस्तृत रिपोर्ट एसडीएम कार्यालय को शीघ्र भेजें। पूरे मामले की जानकारी उपायुक्त बिलासपुर को भी सूचनार्थ भेज दी गई है, ताकि जिला स्तर पर भी इस प्रकरण पर नजर रखी जा सके। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के अंतर्गत अधिग्रहित भूमि पर अवैध निर्माण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।