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Bilaspur News: स्किजोफ्रेनिया इलाज योग्य बीमारी, मरीज को न करें नजरअंदाज

Thu, 05 Jun 2025 11:38 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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मार्कंडेय अस्पताल में बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज पर की चर्चा
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समय पर पहचान होने से स्किजोफ्रेनिया को किया जा सकता है नियंत्रित
एम्स विशेषज्ञों ने आशा वर्करों को किया जागरूक, नुक्कड़ नाटक से बताया इलाज का महत्व

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर के मनोरोग विभाग ने मार्कंडेय अस्पताल में जागरुकता कार्यक्रम चलाया। उपस्थित आशा वर्करों को स्किजोफ्रेनिया बीमारी के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ज्योति गुप्ता ने कहा कि स्किजोफ्रेनिया भी एक बीमारी है, जिसका समय रहते इलाज संभव है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि स्किजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है जिसमें मरीज भ्रम, डर, असामान्य व्यवहार और भावनात्मक दूरी जैसी समस्याओं से जूझता है। समय पर पहचान होने से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से पीड़ित लोगों को नजरअंदाज करने या कलंकित करने की बजाय उन्हें उचित समर्थन व इलाज देना जरूरी है। बीएससी नर्सिंग की छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से समझाया कि इलाज से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। लोगों से अपील की कि झाड़-फूंक से बचें और सही इलाज की ओर बढ़ें। मरीजों की बातों का विरोध या उपहास न करें, संयम रखें, मरीज को प्यार से दवा लेने और डॉक्टर से मिलने के लिए प्रेरित करें, जिसकी बात मरीज मानता है, उनसे मदद लें, दवा समय पर खिलाएं और नियमित जांच कराते रहें। कार्यक्रम में मनोरोग विशेषज्ञ, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, प्रशिक्षु डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, खंड चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य शिक्षक मौजूद रहे। सभी ने स्किजोफ्रेनिया के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को तोड़ने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने की अपील की।
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इनसेट स्किजोफ्रेनिया के लक्षण
ऐसी आवाजें सुनना या चीजें देखना जो वास्तव में नहीं होती, अकेले में बोलना, हंसना या इशारे करना, अजीब व्यवहार, बिना उद्देश्य भटकना, भावनाएं व्यक्त करने में कठिनाई, भावहीन चेहरा, रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि की कमी, ध्यान केंद्रित करने और याद रखने में परेशानी इसके लक्षण हैं।
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इनसेट
दुनिया में हर 300 में से 1 व्यक्ति स्किजोफ्रेनिया से ग्रसित
डॉ. गुप्ता ने बताया कि विश्व स्तर पर लगभग 2.4 करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। हर 300 में से एक व्यक्ति इससे ग्रसित है। मरीजों को सही इलाज और पारिवारिक सहयोग मिल जाए तो वे भी सामान्य जीवन जी सकते हैं।
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