डोल गांव में मनाई देश की पहली शिक्षिक सावित्री बाई फुले की जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने देश की पहली शिक्षिक सावित्री बाई फुले की जयंती बैहना जट्टा पंचायत के गांव डोल में मनाई।
इस अवसर पर महिला मंडल बैहना जट्टा की प्रधान मीरा देवी ने कहा कि महाराष्ट्र में 3 जनवरी 1831 को पैदा हुई सावित्री बाई फुले का विवाह क्रांतिकारी पति ज्योतिबा फुले के साथ हुआ। महिलाओं की दुर्दशा से चिंतित उन्होंने नारी मुक्ति आंदोलन की शुरूआत करते हुए सबसे पहले सशक्त हथियार शिक्षा को अग्रणी करने का बीड़ा उठाया और 18 स्कूल केवल महिलाओं के लिए खोले। वह देश की प्रथम महिला शिक्षिक थीं। महिला मंडल डोल की महासचिव निर्मला देवी ने कहा कि सावित्री बाई फुले ने 28 जनवरी 1853 को गर्भवती, बलात्कार पीड़ितों के लिए बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की। जबकि 19वीं सदी में छुआछूत, सती प्रथा, बाल विवाह और विधवा विवाह निषेध जैसी कुरीतियों के लिए अपने पति के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि सावित्री बाई फुले का संपूर्ण जीवन समाज के वंचित तबके विशेषकर महिलाओं और दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष में बीता। उन्होंने लोगों को उनके अधिकारों के बारे में बताकर अपने हकों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जब महिलाओं के लिए लड़ना शुरू किया तो बिना किसी जातिगत भेदभाव से लड़ाई लड़ी और समाज की गंदी मानसिकता से लड़ते हुए उस मुकाम को हासिल करने में कामयाबी हासिल की, जिसके तहत आज महिलाएं सिर उठाकर पुरुष प्रधान समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रही हैं। इस दौरान नारी शिक्षा एवं उत्थान को लेकर कविताओं और लघु नाटिका के माध्यम से सावित्रीबाई फुले को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में महिला मंडल धड़वाली, बैहना जट्टा, कोठी, दुर्गा सेवा समिति डोल, अनुसूचित जाति युवा विंग, रविदास महासभा बैहना जट्टा और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों व सदस्यों ने भाग लिया। इस मौके पर देवकी देवी, रतनी देवी, बसंती देवी, रीता, मीरा, जमना देवी, कांता, रोशनी, सत्या, इंदुबाला, अंजना, सोमा, गुरदेई, कमला देवी, रीता देवी, फूलां देवी, सुमना, मीरा देवी, आशा देवी, सावित्री आदि उपस्थित रहे।