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Bilaspur News: शास्त्री डिग्री धारकों की अनदेखी पर भड़का संघ

Thu, 30 Apr 2026 10:40 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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संस्कृति संरक्षण संघ हिमाचल प्रदेश के पदा​धिकारी बैठक के दौरान सामुहिक चित्र में। स्त्रोत स्ंघ
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191 पदों में से अधिकांश पर अन्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आरोप
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मामला न्यायालय में विचाराधीन, भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। संस्कृत एवं संस्कृति संरक्षण संघ हिमाचल प्रदेश की वर्चुअल बैठक में शास्त्री पांच वर्षीय डिग्री धारकों की अनदेखी को लेकर कड़ा रोष जताया गया। संघ ने बैचवाइज भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पात्रता मानकों में अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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संस्कृति संरक्षण संघ प्रदेश अध्यक्ष आचार्य मदन शांडिल्य ने आरोप लगाया है कि 191 पदों के मुकाबले केवल 40 से 50 शास्त्री डिग्री धारकों का ही चयन किया गया, जबकि शेष करीब 140 पदों पर ऐसे अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई, जिन्हें पहले पात्र नहीं माना गया था। आरोप है कि बाद में इन अभ्यर्थियों को नियमों में ढील देकर पात्र बनाया गया। संघ पदाधिकारियों ने बताया कि एक अन्य मामले में शिक्षा विभाग ने उच्च न्यायालय में हलफनामा देकर कहा था कि सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले के अंतिम निर्णय तक 193 पदों पर भर्ती नहीं की जाएगी, बावजूद इसके विभाग ने परिणाम घोषित कर नियुक्तियां और संघ ने यह भी आपत्ति जताई कि बीए या एमए में केवल एक विषय के रूप में संस्कृत पढ़ाने वाले अभ्यर्थियों को बीएड के आधार पर शास्त्री पद के लिए योग्य मान लिया गया, जबकि पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों को दरकिनार किया गया। पदाधिकारियों ने कहा कि पांच वर्षों तक शास्त्रों का गहन अध्ययन करने वाले अभ्यर्थियों के साथ यह अन्याय है। इससे न केवल योग्य युवाओं के भविष्य पर असर पड़ेगा, बल्कि संस्कृत महाविद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों का मनोबल भी गिरेगा। संघ ने चेतावनी दी कि यदि शास्त्री डिग्री धारकों को लगातार नजरअंदाज किया गया तो संस्कृत शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। सामाजिक संगठनों से अपील की कि संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आकर इस मुद्दे को सरकार के समक्ष उठाएं।
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