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Bilaspur News: कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन से जुड़ी आरटीआई सुप्रीम कोर्ट के सीपीआईओ को स्थानांतरित

Mon, 20 Apr 2026 11:21 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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सड़क परिवहन मंत्रालय ने बताया मामला सड़क सुरक्षा समिति से संबंधित
फोरलेन के निर्माण, फुटपाथ, पुल, सुरक्षा व्यवस्था पर मांगी थी विस्तृत सूचना
84 किलोमीटर लंबे फोरलेन में फुटपाथ का निर्माण न होने का भी है उल्लेख

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क सुरक्षा से जुड़े एक आरटीआई आवेदन को सर्वोच्च न्यायालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को स्थानांतरित कर दिया है। मामला सर्वोच्च न्यायालय सड़क सुरक्षा समिति से संबंधित बताया गया है। मंत्रालय के अवर सचिव एवं केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी मृत्युंजय कुमार ने जारी पत्र में स्पष्ट किया कि मांगी गई सूचना उनके कार्यालय के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरटीआई आवेदन की प्रति आगे की कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को भेज दी गई है।
बता दें कि आरटीआई आवेदन में कहा गया है कि हिमाचल में कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन का निर्माण किया गया था, जिसका लोकार्पण वर्ष 2023 में किया गया। उल्लेख है कि कई स्थानों पर निर्माण कार्य अधूरे हैं और कई संरचनात्मक कार्य जैसे रिटेनिंग वॉल, ब्रेस्ट वॉल, नालियां, चैंबर, स्ट्रीट लाइट, कलवर्ट, छोटी पुलियां, फुट ब्रिज और अंडरपास पूर्ण नहीं हैं। 84 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन पर फुटपाथ का निर्माण न होने का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि सड़क के दोनों ओर अधिग्रहित भूमि पर सीमांकन के लिए बुर्जियां नहीं लगाई गईं, जबकि जीपीएस आधारित व्यवस्था के तहत वर्ष 2012 में यह प्रक्रिया होनी थी। इससे सड़क की वास्तविक चौड़ाई और अतिक्रमण की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इसके अलावा परियोजना के कुछ हिस्सों में अलाइनमेंट में बदलाव किया गया, जिससे कुछ स्थानों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। मैहला क्षेत्र में टनल नंबर-02 के पास वन-वे ट्रैफिक की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि कुछ स्थानों पर फोरलेन की चौड़ाई में बदलाव किया गया, जबकि अन्य स्थानों पर बिना योजना के विस्तार कर मुआवजा दिया गया, लेकिन मौके पर निर्माण कार्य नहीं हुआ।
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फोरलेन निर्माण से निकलने वाले मलबे के निपटान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आवेदन के अनुसार कई स्थानों पर मलबा डंपिंग साइट की कमी बताई गई है और वन भूमि पर डंपिंग के मामले में जुर्माने की कार्रवाई का भी उल्लेख है। इसके अलावा यह भी कहा गया है कि पहले भी मलबे के डंपिंग को लेकर जुर्माने लगाए गए, लेकिन मलबा हटाने की स्थिति पूरी तरह नहीं बनी है, जिससे आसपास के जल स्रोत, भाखड़ा बांध क्षेत्र, नाव संचालन, मछुआरों की आजीविका और अन्य स्थानीय गतिविधियों पर प्रभाव पड़ा है। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इस फोरलेन पर अब तक बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटनाएं और मौतें हुई हैं, कई मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं। हजारों चालान दर्ज हुए हैं। कई वाहन क्षतिग्रस्त होने की बात भी कही गई है। सड़क के दोनों ओर फुटपाथ न होने से स्थानीय लोगों को अपने दैनिक कार्य, खेतों तक पहुंचने और पशुओं के चारे जैसी गतिविधियों में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण फुटपाथ का अभाव बताया गया है, जिस पर अब तक आवश्यक कार्रवाई नहीं हुई है। लिखा है कि ऊंची रिटेनिंग वॉल के कारण लावारिस पशुओं और जंगली जानवरों को नुकसान हो रहा है, और सुरक्षा के लिए स्टील जाली लगाने की आवश्यकता बताई गई है। वहीं पूरे मामले में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला अब सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी के पास भेजा गया है, जहां से आगे की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के रूप में उप सचिव (सड़क सुरक्षा) को विवरण भी दिया गया है। संवाद
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