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Bilaspur News: चारपाई ढोती मरीज, शहनाई ढूंढती सड़क

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चारपाई ढो रही मरीज, शहनाई ढूंढ रही सड़क
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कुट गांव जाने से कतरा रहे एंबुलेंस चालक, मरीजों को केवल कंधों का सहारा
प्रशासनिक उपेक्षा से ग्रामीणों में रोष, चुनाव के बहिष्कार की दी चेतावनी
मंगल ठाकुर बरठीं (बिलासपुर)। शायद आपको सुनकर अजीब लगे लेकिन यह सच है कि झबोला पंचायत के कुट गांव में आज भी मरीजों को चारपाई ढो रही है और शहनाई पक्की सड़क ढूंढ रही है। जिले के झंडूता विकास खंड की इस पंचायत का वार्ड-1 (कुट गांव) विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर है। यहां के ग्रामीणों के लिए गांव में एंबुलेंस पहुंचना सपने जैसा है। बीमार होने पर अस्पताल पहुंचने का एकमात्र साधन चारपाई (पालकी) है। हाल ही में गांव की 77 वर्षीय बुजुर्ग शीला देवी घर में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। सड़क न होने के कारण ग्रामीणों को उन्हें चारपाई पर ऊबड़-खाबड़ रास्तों में करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ले जाना पड़ा। हालत ऐसी है कि पक्की सड़क न होने के कारण अब लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि एंबुलेंस चालक खराब रास्ते के कारण गांव आने से कतराते हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। सड़क की कमी केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों धर्म सिंह, कुलवंत सिंह, विक्रम सिंह, ज्ञान सिंह ने अपना दर्द साझा कर बताया कि पक्की सड़क न होने के कारण अब लोग इस गांव में अपनी बेटियों की शादी करने से भी कतराने लगे हैं। विकास के अभाव ने युवाओं के भविष्य और रिश्तों के विकल्पों को भी सीमित कर दिया है। पिछले 20 वर्ष से कच्ची सड़क को पक्का करने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन न तो किसी प्रशासनिक अधिकारी और न ही किसी राजनेता ने सुध ली। लगभग आठ परिवारों की इस बस्ती ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो वे आगामी चुनावों का बहिष्कार करेंगे। संवाद
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इनसेट
पंचायत प्रधान शीला देवी ने कहा कि सड़क का मामला सेल्फ में डाल दिया गया है लेकिन निर्माण कार्य में दो मुख्य बाधाएं हैं। पहली कुछ ग्रामीणों की ओर से एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) न देना और दूसरी रास्ते के बीच में वन विभाग की भूमि का होना। यदि लोग एनओसी दे देते हैं तो सड़क का काम तुरंत शुरू करवा दिया जाएगा।
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