अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। भूमि विवाद से जुड़े मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायालय घुमारवीं ने पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए एसडीएम घुमारवीं के आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने माना कि धारा 145 सीआरपीसी के तहत चल रही कार्रवाई को समाप्त करने के आदेश में कोई कानूनी खामी नहीं है।
मामला खसरा नंबर 1206 से जुड़े विवाद का है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भूमि विवाद को लेकर रिपोर्ट तैयार कर एसडीएम घुमारवीं की अदालत में धारा 145 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई शुरू की थी। आरोप था कि भूमि में हस्तक्षेप कर फसल और पेड़ों को नुकसान पहुंचाया गया। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने साक्ष्य पेश किए। इसी बीच यह सामने आया कि संबंधित भूमि विवाद को लेकर सिविल न्यायालय में मामला भी लंबित है। इसके बाद एसडीएम घुमारवीं ने धारा 145 सीआरपीसी की कार्रवाई को समाप्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायालय घुमारवीं में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। याचिका में तर्क दिया गया था कि केवल सिविल मामला लंबित होने के आधार पर धारा 145 की कार्रवाई समाप्त नहीं की जा सकती और कार्यकारी मजिस्ट्रेट को वास्तविक कब्जे की स्थिति पर निर्णय लेना चाहिए था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि धारा 145 सीआरपीसी की कार्रवाई का उद्देश्य शांति व्यवस्था बनाए रखना है। भूमि के अधिकारों का अंतिम निर्णय सिविल न्यायालय में होता है। अदालत ने यह भी पाया कि संबंधित पक्षों की ओर से पहले कार्रवाई समाप्त करने की बात कही गई थी और बाद में उसी आदेश को चुनौती दी गई। ऐसे में अदालत ने पुनर्विचार याचिका में कोई आधार नहीं पाया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए एसडीएम घुमारवीं के 21 अक्तूबर 2019 के आदेश को सही ठहराया।