प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने की जांच की मांग
शिव मंदिर में प्रचार को लेकर बढ़ा था विवाद,कहासुनी के बाद पुलिस को देनी पड़ी थी सूचना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिले की हवाण पंचायत में कथित धर्मांतरण गतिविधियों को लेकर विवाद गहरा गया है। हिंदू संगठनों और स्थानीय ग्रामीणों ने मंगलवार को उपायुक्त बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि क्षेत्र में आर्थिक प्रलोभन देकर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इससे पहले रैली भी निकाली।
संगठनों ने इसके विरोध में शहीद स्मारक से डीसी कार्यालय तक रैली निकाली। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई। संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में कहा है कि उपमंडल घुमारवीं की हवाण पंचायत में कुछ लोग गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पैसे, नौकरी, वाहन, बेहतर इलाज जैसी सुविधाओं का लालच देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
संगठनों का दावा है कि गांव के कुछ परिवार पहले ही धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और अब वे क्षेत्र में ईसाई मत के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। ज्ञापन के अनुसार हाल ही में हवाण स्थित शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के दौरान ईसाई मत के प्रचार का प्रयास किया गया, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। विरोध के बाद दोनों पक्षों में तीखी कहासुनी हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। स्थिति को संभालने के लिए स्थानीय लोगों को बीच-बचाव करना पड़ा, बाद में पुलिस को भी सूचना दी गई। हिंदू संगठनों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से क्षेत्र में धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने का खतरा पैदा हो रहा है।
ज्ञापन में प्रशासन से जिले में चल रही कथित धर्मांतरण गतिविधियों की व्यापक जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है। संगठनों ने कहा कि वे किसी धर्म विशेष के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रलोभन या दबाव के माध्यम से कराए जाने वाले धर्मांतरण को स्वीकार नहीं किया जा सकता। चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए तो जिलेभर में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में विश्व हिंदू परिषद के प्रांत मंत्री तुषार डोगरा, जिला मंत्री विशाल नड्डा, संवेदना संस्था के सचिव सत्यन शर्मा, जिला बजरंग दल संयोजक सूर्या चंदेल, विशाल चंदेल, इंद्र सिंह डोगरा समेत कई कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल रहे।