दो महीने की जेल और 2 लाख जुर्माने की सजा बरकरार
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने सुनाया फैसला
2018 से चल रहे विवाद में मिली सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश घुमारवीं की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। दोषी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने दोषी को दो महीने के साधारण कारावास और शिकायतकर्ता को दो लाख रुपये का मुआवजा देने की सजा को यथावत रखा है।
मामले के अनुसार घुमारवीं निवासी शिकायतकर्ता और दोषी के बीच अच्छे संबंध थे। इसी आधार पर दोषी ने जुलाई 2017 में अपने व्यवसाय में सुधार के लिए शिकायतकर्ता से 1,50,000 रुपये उधार लिए थे। जब फरवरी 2018 तक दोषी ने यह राशि वापस नहीं की, तो शिकायतकर्ता के बार-बार मांगने पर उसने पंजाब नेशनल बैंक का एक चेक जारी किया। जब इस चेक को भुगतान के लिए बैंक में लगाया, तो बैंक ने इसे खाते में पर्याप्त राशि न होने की टिप्पणी के साथ वापस कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अपने वकील के माध्यम से 29 मार्च 2018 को कानूनी नोटिस भेजा। आरोपी ने 15 दिनों के भीतर भुगतान करने का आश्वासन तो दिया, लेकिन पैसे नहीं चुकाए। अंत में पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में जेएमएफसी कोर्ट नंबर-2 घुमारवीं ने 8 जनवरी 2025 को राजू मोंगा को दोषी करार दिया था और 19 फरवरी 2025 को सजा सुनाई थी। दोषी ने इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी थी, जिसमें दलील दी गई थी कि उसने कोई पैसा उधार नहीं लिया था और न ही कोई चेक जारी किया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर से इन्कार नहीं किया है। कानून के अनुसार यदि चेक किसी के पास है, तो यह माना जाता है कि वह कानूनी देनदारी के लिए ही दिया गया है, जिसे गलत साबित करने में आरोपी नाकाम रहा। अदालत ने माना कि चेक बाउंस के मामले वित्तीय लेनदेन में भरोसे को तोड़ते हैं, इसलिए सजा में किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती। अदालत ने दोषी की अपील को खारिज करते हुए उसे तुरंत जेएमएफसी कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए हैं, ताकि वह अपनी सजा काट सके। यदि वह सरेंडर नहीं करता है, तो अदालत ने पुलिस को सजा पर अमल करवाने के निर्देश दिए हैं।