-15 पंचायतों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, निर्णय वापस लेने की मांग
ग्रामीण बोले, बेटियों और गरीब विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
-वर्ष 2007 में स्थापित हुआ था कॉलेज, बाद में शुरू हुए विज्ञान और वाणिज्य संकाय
संवाद न्यूज़ एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को बंद करने के प्रदेश सरकार के निर्णय के खिलाफ क्षेत्र में व्यापक जनाक्रोश देखने को मिल रहा है। जुखाला और आसपास की करीब 15 पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, अभिभावकों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर सरकार के फैसले का विरोध जताया है।
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त बिलासपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर दोनों संकायों को यथावत जारी रखने तथा प्रवेश प्रक्रिया तत्काल बहाल करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की ओर से जारी यह फैसला ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उनका आरोप है कि बिना किसी व्यापक सर्वेक्षण और जमीनी अध्ययन के यह निर्णय लिया गया है, जिससे हजारों विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्रभावित होंगे। ज्ञापन में बताया गया है कि राजकीय महाविद्यालय जुखाला की स्थापना वर्ष 2007 में क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और मांग को देखते हुए वर्ष 2012 में वाणिज्य संकाय और वर्ष 2016 में विज्ञान संकाय की शुरुआत की गई थी। इन दोनों संकायों के शुरू होने के बाद क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों को घर के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिला। लेकिन 2 जून 2026 को जारी अधिसूचना के तहत विज्ञान और वाणिज्य संकायों में नए प्रवेश बंद करने तथा इन संकायों को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।
इस निर्णय के सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में असंतोष का माहौल है। ग्रामीणों ने कहा कि महाविद्यालय में दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। इनमें अधिकांश छात्राएं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से संबंधित हैं। यदि विज्ञान और वाणिज्य संकाय समाप्त कर दिए जाते हैं तो उन्हें बिलासपुर या अन्य शहरों में पढ़ाई के लिए जाना पड़ेगा, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। अभिभावकों का कहना है कि कई परिवार ऐसे हैं जो बच्चों को बाहर पढ़ाने का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में अनेक छात्राओं की उच्च शिक्षा बीच में ही प्रभावित हो सकती है। कहा कि कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या पर्याप्त है और विज्ञान तथा वाणिज्य विषयों में भी छात्रों का अच्छा नामांकन रहता है। ऐसे में इन संकायों को बंद करने का निर्णय लोगों के गले नहीं उतर रहा है। उनका कहना है कि यदि सरकार शिक्षा के विस्तार की बात करती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से संचालित संकायों को बंद करना उस नीति के विपरीत है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो वर्तमान सत्र में प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो जाएगी और विद्यार्थियों को मजबूरी में अन्य संस्थानों की ओर रुख करना पड़ेगा।
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पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर से भी मिले प्रतिनिधि
इस मुद्दे को लेकर पंचायत प्रतिनिधि और क्षेत्र के लोग पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर से भी मुलाकात कर चुके हैं। प्रतिनिधियों के अनुसार रामलाल ठाकुर ने इस विषय को प्रदेश के शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाने और समाधान के लिए प्रयास करने का आश्वासन दिया है। जनप्रतिनिधियों को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार के समक्ष मजबूती से उठाना चाहिए ताकि विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करने वाले इस फैसले पर पुनर्विचार हो सके।
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आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को बंद करने का निर्णय जल्द वापस नहीं लिया गया तो क्षेत्र की सभी पंचायतें संयुक्त रूप से बड़ा जनआंदोलन शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के अधिकार और विद्यार्थियों के भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर धरना-प्रदर्शन, हस्ताक्षर अभियान और व्यापक जनसंघर्ष का रास्ता अपनाया जाएगा।