बिलासपुर। जिला अधिवक्ता संघ बिलासपुर का वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय राजेंद्र कुमार हांडा की संदेहास्पद परिस्थितियों में कोविड सेंटर आईजीएमसी शिमला में हुई मौत मामले में अनिश्चितकालीन शांतिपूर्वक क्रमिक धरना-प्रदर्शन दूसरे दिन में पहुंच गया।
प्रदर्शन के दूसरे दिन अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना संकल्प दोहराया कि जब तक प्रदेश सरकार इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश नहीं देती, तब तक यह क्रमिक धरना प्रदर्शन चलता रहेगा। जो कि कुछ समय के बाद बड़ा रूप धारण कर पूरे प्रदेश में जन आंदोलन की दिशा में बदल सकता है। जिला अधिवक्ता संघ बिलासपुर के तत्वाधान में इस संबंध में संघर्ष समिति का गठन किया गया है। इस समिति की ओर से अन्य जिला और सब डिवीजन अधिवक्ता संघों को इस संघर्ष में सहयोग करने का जो अनुरोध भेजा है, उसके सकारात्मक परिणाम आने लगे हैं। दूसरे दिन जिला अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष सर्वजीत सिंह, अधिवक्ता तुषार डोगरा, राकेश ठाकुर, नितिन कौंडल और मस्तराम बंसल की टीम धरने पर बैठी।
इस दौरान तुषार डोगरा और धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने कहा कि अधिवक्ताओं का यह आंदोलन अभी प्रांरभिक दौर में है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस विषय पर अधिवक्ता विधिक परिषद हिमाचल प्रदेश और जिला अधिवक्ता संघ बिलासपुर के संयुक्त शिष्टमंडल को दिए आश्वासन पर गंभीरता नहीं दिखाई। कहा कि अगर समय रहते इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। इस मौके पर संघर्ष समिति सदस्य अधिवक्ताओं दौलत राम शर्मा, तेजस्वी शर्मा, भगत सिंह वर्मा, रजनीश शर्मा, जिला महासचिव आदित्य मोहन कश्यप के साथ ओम प्रकाश गौतम, रोशन लाल ठाकुर, प्रवेश चंदेल, अमित शर्मा, अमर सिंह ठाकुर, नंद लाल ठाकुर, राम सरन ठाकुर, सुरेंद्र चौधरी, संजीव रनोट, दलजीत संधू, पंकज वर्मा, विकास शर्मा, गोपाल ठाकुर, रोहित शर्मा, विजय जालप, नीरज बसु, वनिता धीमान, किरण, दीप शिखा, सुचिता महाजन, स्वतंत्र कुमार, रूप लाल कटवाल, मुकेश ठाकुर, सुनील मेहता आदि ने नारेबाजी की।