नालागढ़ में दवा कंपनी से निकलने वाले प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए प्रभावित लोग- संवाद।
एसडीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को भेजा ज्ञापन, उद्योग का गेट बंद करने की दी चेतावनी
प्रदर्शन में सामाजिक संगठन, स्थानीय लोग और विधायक व पूर्व विधायक हुए शामिल
संवाद न्यूज एजेंसी
बद्दी (सोलन)। नालागढ़ के पलासड़ा में एक दवा उद्योग से फैल रहे प्रदूषण के विरोध में जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने एसडीएम के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भेजते हुए चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो कंपनी का घेराव कर गेट बंद कर दिया जाएगा। प्रदर्शन में विधायक हरदीप बावा, पूर्व विधायक लखविंद्र राणा समेत विभिन्न पंचायतों के लोग शामिल हुए। सभी लोग पहले सौढ़ी गांव में एकत्रित हुए और वहां से नालागढ़ अनाज मंडी तक पहुंचे। इसके बाद जुलूस की शक्ल में बाजार होते हुए एसडीएम कार्यालय पहुंचे। विधायक हरदीप बावा ने कहा कि कंपनी से निकलने वाला प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यावरण मित्र उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं रडियाली पंचायत के पूर्व प्रधान हरदीप सिंह बावा ने कहा कि कंपनी से निकलने वाली गैस के कारण लोगों को दिन-रात घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं। लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। वहीं, पूर्व प्रधान इंदू वैद्य ने आरोप लगाया कि कंपनी की ओर से केमिकल युक्त पानी खुले में छोड़ा जा रहा है और अत्यधिक पानी के उपयोग से जल स्तर प्रभावित हो सकता है। पूर्व विधायक लखविंद्र राणा ने कहा कि प्रदूषण के कारण क्षेत्र में रहना मुश्किल हो गया है। सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि लोगों में खुजली, गले में खराश और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने कंपनी को बंद करने या अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
प्लांट को आबादी से दूर किया जाए शिफ्ट
हिम परिवेश संस्था के लक्ष्मी चंद ठाकुर, हंडूर सोसायटी के मोहन लाल और हिमालय नीति अभियान के प्रदेश अध्यक्ष गुमान सिंह, बाल कृष्ण, अधिवक्ता नरेश घई ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनदेखी का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। लोगों को दिन-रात खिड़की-दरवाजे बंद कर कैद रहना पड़ता है। इस प्लांट को आबादी से दूर शिफ्ट किया जाए या पूरी तरह बंद किया जाए।