अब डिजिटल रिकॉर्ड से तय होगी शहर के हर भवन की पहचान
नगर परिषद करेगी सत्यापन, 999 साल की लीज पर बसा है यह शहर
तीन माह में सर्वे पूरा कर शहर का रिकॉर्ड किया जाएगा डिजिटल
भाखड़ा विस्थापन के बाद पहली बार किया जाएगा संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण
अनिल ठाकुर
बिलासपुर। नगर परिषद बिलासपुर की ओर से शहर में इन दिनों घर-घर जाकर संपत्ति सर्वे का कार्य चल रहा है। यह सर्वे आर्यभट्ट जियो-इन्फॉर्मेटिक्स एंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के माध्यम से किया जा रहा है, ताकि शहर की सभी संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। नगर परिषद के अधीन चल रहे इस अभियान के तहत अब हर भवन, दुकान, कार्यालय, होटल, धर्मशाला और सरकारी भवन की सटीक लोकेशन, उपयोग और स्वामित्व की जानकारी दर्ज की जा रही है।
यह सर्वे प्रॉपर्टी सर्वे फॉर्म शीर्षक के साथ तैयार किया जाएगा। वहीं करीब तीन माह में सर्वे पूरा कर पूरे शहर के रिकॉर्ड को डिजिटल कर दिया जाएगा, जिसमें संपत्ति की पहचान, उपभोक्ता नंबर, भवन का प्रकार, मालिक का नाम, आधार नंबर, बिजली-पानी कनेक्शन, मंजिलों की संख्या, सीवरेज व कचरा निपटान की स्थिति तक के सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है। बिलासपुर शहर देश का एकमात्र ऐसा नगर है जो पूरी तरह से 999 साल की लीज पर बसाया गया है। भाखड़ा बांध के निर्माण के समय पुराने बिलासपुर शहर को जलमग्न कर दिया गया था, जिसके बाद वर्ष 1960 के दशक में इस नए बिलासपुर शहर का पुनर्वास किया गया। शहर के निवासी तब से अब तक लीजधारी हैं, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास है। अब पहली बार राज्य सरकार ने इस शहर की संपत्ति का वैज्ञानिक सर्वेक्षण शुरू किया है, जिससे यहां के भवनों की सटीक स्थिति, क्षेत्रफल और उपयोग का डिजिटल रिकॉर्ड बनेगा। संवाद
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हर संपत्ति का होगा यूनिक आईडी नंबर
सर्वे टीम प्रत्येक भवन का प्रॉपर्टी मैप आईडी और कंज्यूमर आईडी (सिस्टम जेनेरेटड) तैयार कर रही है। इसके साथ भवन की फोटो उसी मैप आईडी के साथ अपलोड की जाएगी ताकि किसी भी संपत्ति की पहचान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुरंत की जा सके। फॉर्म में यह भी पूछा गया है कि भवन निजी, सरकारी या नगर परिषद की संपत्ति है। मालिक या आवासीय व्यक्ति का नाम, आधार नंबर, ईमेल, जल और बिजली कनेक्शन नंबर, परिवारों की संख्या और व्यावसायिक उपयोग जैसी जानकारी भी एकत्र की जा रही है।
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सुविधाओं की स्थिति भी दर्ज
सर्वे फॉर्म में यह स्पष्ट रूप से दर्ज किया जा रहा है कि भवन में सीवरेज लाइन से कनेक्शन है या नहीं, क्या वहां अपना सेफ्टी टैंक है, क्या नगर परिषद की कचरा संग्रहण सेवा उपलब्ध है, और क्या भवन में वर्षा जल संचयन संरचना या सोलर पैनल लगे हुए हैं। इसी तरह से भवन के उपयोग की श्रेणियां तय की गई हैं। इनमें आवासीय, व्यावसायिक, गैर-आवासीय संस्थागत भवन जैसे बैंक, होटल, रेस्टोरेंट, क्लीनिक, स्कूल, मंदिर, कार्यालय आदि शामिल हैं। प्रत्येक श्रेणी के भवनों के लिए क्षेत्रफल के आधार पर अलग-अलग कॉलम रखे गए हैं ताकि संपत्ति कर निर्धारण और उपयोग का आकलन आसान हो सके।
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नगर परिषद करेगी सत्यापन
सर्वेयर की ओर से भरी गई जानकारी को बाद में नगर परिषद का प्रतिनिधि सत्यापित करेगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी संपत्ति छूट न जाए और जो डेटा डिजिटल सिस्टम में दर्ज हो, वह सही और अद्यतन हो। यह डिजिटल रिकॉर्ड शहर की सीमाओं, भवनों की वैधता और लीज व्यवस्था से जुड़े भविष्य के कानूनी और प्रशासनिक विवादों को सुलझाने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
वर्षा चौधरी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद बिलासपुर।