बिलासपुर। सरकार द्वारा निजी बसों में सौ प्रतिशत सवारी मान्य करने के बाद भी जिले में निजी बसों के पहिए थमे रहे। बस मालिक अपनी मांगों को लेकर अभी भी अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी पूरी मांगे नहीं मान लेती तब तक वह बसें नहीं चलाएंगे।
लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने निजी बसों में 100 प्रतिशत सवारी बिठाने की अनुमति दे दी है। लेकिन आम जन को इसका कोई लाभ नहीं हुआ। क्योंकि जिला की निजी बस ऑपरेटर यूनियन सड़कों पर बसें उतारने को तैयार नहीं है। ऑपरेटरों का कहना है कि सरकार ने डीजल की कीमतों में 15 रूपये की बढ़ोत्तरी कर दी है। लेकिन बस किराया नहीं बढ़ाया है। इससे बसें चलाना घाटे का सौदा बन गया है। कहा कि बस स्टॉफ का जीवन बीमा और अन्य मांगों पर भी सरकार कोई विचार नहीं कर रही है। कहा कि अगर ऐसे में ऑपरेटर बसें चलाना शुरू कर देंगे तो स्टाफ के खर्चे से लेकर बस के तेल तक का खर्चा भी उठाना पड़ेगा। जिससे उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। कहा कि अभी तक तो वो बस स्टाफ के लोगों के वेतन को जैसे तैसे पूरा कर रहे थे। लेकिन डीजल की कीमतें एकदम से इतनी बढ़ गई कि वो बिना किराया बढ़ाए बसें शुरू नहीं कर सकते।
बाबा नाहर सिंह जी निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रधान रमेश ठाकुर ने कहा कि सरकञार ने घोषणा तो कर दी कि 100 प्रतिशत सवारी के साथ बसें चलेंगी। लेकिन अभी तक बसों में 60 प्रतिशत सवारी भी पूरी नहीं हो पा रही है। स्कुल कॉलेज सब बंद है। लोग कोरोना के डर से घरों से बाहर निकलने से डर रहे हैं। ऐसे में ऑपरेटर बस रूट शुरू भी करेंगे तो भी बस के तेल का खर्च नहीं निकल पाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार किराए में बृद्धि नहीं करती और बस स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उनका जीवन बीमा नहीं करती है जिला में निजी बसें चलना शुरू नहीं होगी।