कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए अजय चंदेल, अनिल हैप्पी और निर्मला राणा। स्रोत भाजपा
भाजपा की कमेटी गठित होते ही नगर निकाय चुनाव से पहले दलबदल तेज
अजय चंदेल, अनिल हैप्पी, निर्मला राणा ने थामा भाजपा का दामन
भाजपा में शामिल होने के बाद संबंधित वार्डों से बदलेगा टिकट का समीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नगर निकाय चुनावों से पहले नगर परिषद बिलासपुर की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। चुनावी तैयारियां शुरू होने से पहले ही कांग्रेस को करारा झटका लगा है। बुधवार को शहर के कई प्रभावशाली और जनाधार वाले चेहरों ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा में शामिल होने वालों में प्रमुख व्यवसायी एवं समाजसेवी अनिल हैप्पी, अजय चंदेल और पूर्व पार्षद निर्मला राणा शामिल हैं।
इन नेताओं का पार्टी बदलना स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर नगर परिषद क्षेत्र में इनके प्रभाव को देखते हुए इसे भाजपा के लिए रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। सदर के विधायक त्रिलोक जमवाल ने सभी को पार्टी का पटका पहनाकर भाजपा में शामिल कराया। इस मौके पर भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिससे यह साफ संकेत गया कि पार्टी इसे एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर पेश कर रही है। इस घटनाक्रम को भाजपा के शक्ति प्रदर्शन और संगठन विस्तार की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जमवाल ने कहा कि भाजपा राष्ट्रवादी विचारधारा पर काम करने वाली पार्टी है और देशहित में सोचने वाले लोग लगातार इससे जुड़ रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का हवाला देते हुए कहा कि जनता का भरोसा भाजपा और एनडीए पर लगातार बढ़ रहा है, जो भविष्य की राजनीति की दिशा तय कर रहा है। त्रिलोक जमवाल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी परिवारवाद और झूठी गारंटियों की राजनीति करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल में कांग्रेस ने सत्ता पाने के लिए बड़े-बड़े वादे किए, लेकिन जमीनी स्तर पर विकास नजर नहीं आया। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो नगर निकाय चुनाव से ठीक पहले हुए इस दलबदल से स्थानीय समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है। भाजपा जहां इसे अपनी बढ़ती पकड़ के रूप में देख रही है, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक चेतावनी के रूप में भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि इस तरह का सिलसिला जारी रहता है तो बिलासपुर की नगर राजनीति में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है, जबकि कांग्रेस को संगठनात्मक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। तीनों दिग्गजों के भाजपा में शामिल होने से इनके वार्ड से अब टिकट आवंटन का समीकरण भी बदलेगा।