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Bilaspur News: साक्ष्यों की चेन टूटने से कोर्ट में ढहा पुलिस का एनडीपीएस केस

Wed, 06 May 2026 11:17 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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चरस तस्करी के आरोपी को संदेह का लाभ, अदालत ने किया बाइज्जत बरी
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गवाहों के बयानों में विरोधाभास और सील गुम होने पर न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी
.विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। नार्कोटिक्स के मामलों में जांच की शुद्धता कितनी अनिवार्य है, इसका उदाहरण विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर की अदालत से आए एक फैसले में देखने को मिला। न्यायालय ने चरस तस्करी के एक मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोपी को बाइज्जत बरी करने के आदेश सुनाए हैं। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ सचेत कब्जे को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा, जिससे पुलिस की पूरी थ्योरी ही संदेहास्पद हो गई।
मामला 12 अप्रैल 2019 का है, जब बरमाणा पुलिस ने सलापड़ पुल के पास नाकाबंदी के दौरान एक नैनो कार से 542 ग्राम चरस बरामदगी का दावा किया था। पुलिस ने दलील दी कि रात का वक्त होने के कारण कोई स्वतंत्र गवाह नहीं मिला। हालांकि, क्रॉस-एग्जामिनेशन में पुलिसकर्मियों के अपने ही बयानों ने इस दावे की हवा निकाल दी। गवाहों ने स्वीकार किया कि मौके से उस दौरान कई गाड़ियां गुजर रही थीं। अदालत ने इस पर हैरानी जताई कि जब लोग उपलब्ध थे, तो पुलिस ने केवल विभागीय कर्मचारियों को ही गवाह बनाना उचित क्यों समझा। सुनवाई के दौरान तब स्थिति असहज हो गई जब पुलिस वह मूल ''सील'' कोर्ट में पेश नहीं कर सकी, जिससे नशे के पैकेट को सील किया गया था। गवाह ने इसे गुम होना बताया। इसके अलावा, डैशबोर्ड खोलने की प्रक्रिया को लेकर भी जांच अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मियों के बयानों में भारी विरोधाभास दिखा। किसी ने इसे कैरी बैग कहा तो किसी ने पॉलीथीन। अदालत ने इन विसंगतियों को मामूली नहीं, बल्कि केस की जड़ काटने वाला माना।
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न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि एनडीपीएस जैसे कठोर कानून में चेन ऑफ कस्टडी का अटूट होना जरूरी है। सील का गायब होना और बयानों में विरोधाभास यह दर्शाता है कि जांच में भारी लापरवाही बरती गई। इसी का फायदा देते हुए अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त कर दिया और जब्त नशे को नष्ट करने के आदेश दिए।
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