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राज्यपाल को सरकारी कार्यालय बंद करने के लिए भेजे 94 ताले

Sat, 28 Jan 2017 11:49 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिलासपुर।
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विस्थापित समिति के सदस्य राज्यपाल को ताले भेजते हुए। - फोटो : अमर उजाला
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कीरतपुर नेरचौक विस्थापित और प्रभावित समिति ने गैरकानूनी रूप किए गए भूमि अधिग्रहण को लेकर राज्यपाल से न्याय की गुहार लगाई है। इसके साथ ही उन्होंने सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली से नाराज होकर इन सभी कार्यालयों को बंद करने के लिए राज्यपाल को 94 ताले भी भेजें हैं।
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विस्थापितों और प्रभावितों का कहना है कि उन्होंने न्याय के लिए प्रदेश सरकार, उपायुक्त से लेकर राजस्व विभाग, पुलिस और अन्य सभी विभागों से न्याय की मांग की। मगर इसके बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला।

हालत ऐसी है कि उनकी जायज समस्याओं पर संबंधित विभाग ने कोई कदम उठाने भी जरूरी नहीं समझे। इसका परिणाम यह है कि सैकड़ों लोगों को अपनी शेष बची भूमि का आज तक पता नहीं चल पाया है।
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वहीं गैर कानूनी रूप से हो रही ब्लास्टिंग से भी लोगों के घरों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समिति का कहना है कि उनकी समस्याओं पर कोई भी विभाग गौर नहीं कर रहा है। अब समिति ने राज्यपाल कार्यालय को 82 ताले भेज रही हैं। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि बिलासपुर के विभिन्न 82 कार्यालयों में ताले लगा दिए जाएं।

समिति के अध्यक्ष किशन सिंह, महासचिव मदन लाल शर्मा और कोषाध्यक्ष सरवन कुमार ने कहा कि जवाबदार अधिकारी ग्रामीणों की शिकायतों को एक टेबल से दूसरे टेबल के लिए सरका रहे हैं।

उन्होंने राज्यपाल से प्रार्थना की है कि जिला बिलासपुर के इन सभी कार्यालयों को तुरंत बंद कर दिया जाए ताकि ग्रामीणों को इस बात की संतुष्टि हो जाए कि जिला बिलासपुर में न्याय नाम की कोई चीज नहीं हैं।

कहा कि जिस खसरा नंबर का अधिग्रहण हुआ है उस खसरा नंबर से भू-मालिक की कितनी भूमि कहां पर शेष बची है, जिससे सड़क निर्माण में अर्जित की गई भूमि की सही पुष्टि हो जाए और ग्रामीण अपनी शेष बची निजी भूमि में अपना काम कर सकें।

मगर विभाग यह सब करने में असमर्थ है, जब राजस्व विभाग कुछ करने में समर्थ ही नहीं है, तो इन कार्यालयों को खोलने का भी कोई औचित्य
नहीं है।

समिति जिला बिलासपुर के 82 पटवार वृत्त, दो उप तहसील, चार तहसील कार्यालय, एक कार्यालय जिला राजस्व अधिकारी सहित 94 कार्यालयों को बंद किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सब अधिकारी न्याय करने के योग्य नहीं है।
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