नगर निकायों में अध्यक्ष के ताज का फैसला सोमवार को हो जाएगा। जिला की तीन नगर परिषदों और एक नगर पंचायत में 18 जनवरी को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुने जाएंगे।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की ताजपोशी को दावेदार गोटियां फिट करने में जुटे हुए हैं। चुनाव के बाद कांग्रेस और भाजपा समर्थित पार्षदों की तस्वीर साफ हो गई है। लेकिन, नगर पंचायत तलाई को छोड़ दें, तो बाकी तीनों नगर परिषदों पर किसी एक नाम पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की अभी तक सहमति नहीं बन पाई हैं।
हालांकि 11 वार्डों वाली नगर परिषद बिलासपुर में सात कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार जीतकर पहुंचे हैं। अध्यक्ष पद महिला के लिए आरक्षित होने से कांग्रेस यहां पर सोमा देवी और शालिनी में से एक की ताजपोशी हो सकती है।
इसके लिए अंदरखाते भी कशमकश जारी है। जबकि सात वार्डों वाली नगर परिषद श्रीनयना देवी जी में भाजपा समर्थित पार्षदों का दबदबा है।
नगर परिषद में भाजपा समर्थित पांच पार्षद जीतकर आए हैं। यहां पर अध्यक्ष पद ओपन होने और निवर्तमान अध्यक्ष मुनीष का अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल होने से स्थिति रोचक हो गई है।
बलदेव बनेंगे नपं तलाई अध्यक्ष
सात वार्डों वाली नगर पंचायत तलाई में पांच पार्षद भाजपा समर्थित जीते हैं। अध्यक्ष का पद एससी के लिए रिजर्व होने से भाजपा समर्थित बलदेव का अध्यक्ष तय माना जा रहा है। इसकी घोषणा भाजपा ने रविवार को ही कर दी है। यहां पर अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए मात्र औपचारिकता ही शेष रह गई है।
घुमारवीं नगर परिषद में स्थिति रोचक
सात वार्डों वाली घुमारवीं नगर परिषद में अध्यक्ष की ताजपोशी को स्थिति रोचक बनी हुई है। यहां पर चार वार्डों मेें कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।
अध्यक्ष पद ओपन होने के कारण यहां पर कई दावेदार दौड़ में है। अध्यक्ष पद की दौड़ में निवर्तमान अध्यक्ष रीता सहगल और नगर पंचायत के दौरान अध्यक्ष रह चुकी गीता महाजन के अलावा सीपीएस राजेश धर्माणी के खासमखास श्याम लाल पर भी नजरें हैं। यहां पर अगर रीता सहगल अध्यक्ष बनीं, तो यह उनकी हैट्रिक होगी। रीता सहगल इससे पहले 2008 और 2010 में अध्यक्ष रह चुकी हैं।
जबकि गीता महाजन 1995 में नगर पंचायत के दौरान अध्यक्ष पद संभाल चुकी हैं। लिहाजा, यहां पर किसी एक के नाम पर सहमति बनाना कांग्रेस के लिए भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
जबकि, दूसरी ओर बहुमत हासिल करने से मात्र एक सीट से पीछे रह चुकी भाजपा को भी कमतर नहीं आंका जा सकता है। यहां से भाजपा समर्थित और निवर्तमान उपाध्यक्ष राकेश चोपड़ा पर भी सभी की निगाहें लगी हुई है।