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झूठे दस्तावेज देकर प्राप्त किया शौच मुक्त पंचायत का दर्जा

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बरठीं (बिलासपुर)। विकास खंड झंडूता के तहत ग्राम पंचायत बड़गांव ने खुले में शौच मुक्त पंचायत होने के झूठे दस्तावेज देकर प्रमाणपत्र हासिल कर लिया है। पंचायत प्रतिनिधियों ने झूठे आंकड़े देकर स्वच्छ गांव और स्वच्छ पंचायत का दर्जा तो हासिल कर लिया लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को इससे धक्का लगा है।
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सरकारी रिकॉर्ड की बात करें तो पंचायत खुले में शौच मुक्त हो चुकी है। पंचायत प्रधान द्वारा गरीब लोगों को शौचालय न बनवाकर पंचायत के रसूखदारों को 10 से 15 वर्ष पूर्व में बने शौचालयों को भी सरकारी अनुदान के रूप मे 12-12 हजार दे दिया गया। ग्राम पंचायत बड़गांव के री गांव में आज भी 5 परिवारों के करीब एक दर्जन लोग खुले में शौच करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि वह गरीब परिवार से संबंध रखते हैं और शौचालय बनाने में असमर्थ हैं। उन्होंने पंचायत के प्रतिनिधियों के पास शौचालय बनाने की गुहार लगाई थी लेकिन आज दिन तक पंचायत ने उनको शौचालय बनाने के राशि जारी नहीं की। जिस कारण उन्हें आज भी खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है।
बिना जांच किए पंचायतों को यह पुरस्कार दिया जाना जनप्रतिनिधियों के साथ विभाग को भी कटघरे में खड़ा करता है। बंद कमरों में स्वच्छ पंचायत का दर्जा देने वाले अधिकारियों पर भी सवालिया निशान खड़ा होना लाजिमी है।
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स्वच्छ भारत मिशन के खंड समन्वयक झंडूता रमेश कुमार ने बताया कि पंचायतों के माध्यम से 12000 शौचालय बनाने के लिए दिए जाते हैं। ग्राम पंचायत बड़गांव के 5 परिवारों के शौचालय क्यों नहीं बने, इसकी जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सर्वे करवाकर जल्दी ही 5 परिवारों को शौचालय के लिए पैसा उपलब्ध करा दिया जाएगा। खंड विकास अधिकारी झंडूता धर्मपाल ने बताया कि पंचायत की रिपोर्ट के आधार पर ही स्वच्छ पंचायत का दर्जा सरकार द्वारा दिया जाता है। कुछ परिवारों के लिए यदि अभी भी शौचालय निर्माण नहीं हुआ है तो इसके लिए पंचायत स्वयं जिम्मेदार है।
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