फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: धराड़सानी में नौतोड़ इंतकालों में ओवरलैपिंग

Mon, 05 Jan 2026 11:22 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
एक्सक्लूसिव
विज्ञापन

संशोधित

राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

- राजस्व रिकॉर्ड, फील्ड बुक और पटवारी रिपोर्ट में पुष्टि, नहीं मेल खा रहीं सीमाएं

- कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन भू अधिग्रहण में सामने आई गड़बड़ी

संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। उपमंडल झंडूता के मौजा धराड़सानी में वर्ष 1970 से 1975 के बीच स्वीकृत दो नौतोड़ इंतकालों में गंभीर ओवरलैपिंग (सीमा-आवरण) का मामला सामने आया है। राजस्व रिकॉर्ड, फील्ड बुक और पटवारी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों नौतोड़ों की आपस में लगती सीमाएं सही ढंग से मेल नहीं खा रहीं। इससे न केवल रकबे में त्रुटि उजागर हुई है, बल्कि तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार मौजा धराड़सानी में खसरा नंबर 419/201 से संबंधित पहली नौतोड़ इंतकाल नंबर 260, 28 जनवरी 1973, के तहत खसरा नंबर 492/419/201 में 1 बीघा 8 बिस्वा भूमि एक व्यक्ति को आवंटित की गई थी। यह नौतोड़ प्रदेश सरकार की ओर से मिसल नंबर 1023, 29 जनवरी 1970, के आदेशों के तहत स्वीकृत हुई थी। इसी तरह दूसरी नौतोड़ इंतकाल नंबर 306, 7 जून 1975, के अंतर्गत खसरा नंबर 493/419/201 में 3 बीघा 10 बिस्वा भूमि दूसरे व्यक्ति को दी गई। यह नौतोड़ उपायुक्त बिलासपुर के आदेश मिसल नंबर 422/69, दिनांक 16 नवंबर 1973, के आधार पर स्वीकृत बताई गई है। राजस्व रिकॉड का अवलोकन करने से यह तथ्य सामने आया कि दोनों नौतोड़ों की सीमाओं में दर्ज 44 कर्म की जगह 54 कर्म होना पाया गया। इससे इस मेढ़ का आपस में मिलान नहीं हो पा रहा है। जांच में पाया गया कि इंतकाल नंबर 260 की 54 कर्म वाली मेढ़, इंतकाल नंबर 306 की 44 कर्म वाली मेढ़ के ऊपर से गुजर रही है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से ओवरलैपिंग को दर्शाती है। नियमों के अनुसार यदि बाद में स्वीकृत नौतोड़ में पहले से स्वीकृत भूमि के साथ ओवरलैपिंग पाई जाती है, तो रकबे में संशोधन कर नजरसानी रिपोर्ट बनाना अनिवार्य था। लेकिन इस मामले में बिना किसी गहन जांच के राजस्व रिकॉर्ड में अमल दरामद कर दिया गया। हैरानी का विषय यह है कि 10 कर्म का अंतर होने के बाद भी रकबा वही रहा। जबकि यह बढ़ना चाहिए था।
विज्ञापन


कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान यह अनियमितता हुई। इससे पहले यह रिकॉर्ड सही था। अगर यह सही नहीं हुआ तो आसपास की भूमि को लेकर विवाद बढ़ेगा। आरोप है कि अधिग्रहण के दौरान एनएचएआई से जुड़े राजस्व कर्मचारियों ने भी रिकॉर्ड का गहराई से अध्ययन नहीं किया और राजस्व दस्तावेजों में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियां की गईं। केंद्र सरकार के नाम दर्ज इंतकाल नंबर 799 के साथ संलग्न ततीमा जात और फील्ड बुक में भी कर्म माप को लेकर विसंगतियां पाई गई हैं। तहसीलदार झंडूता के आदेशों की अनुपालना में तैयार की गई पटवारी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दोनों नौतोड़ इंतकालों में ओवरलैपिंग है। रिपोर्ट के अनुसार अधिग्रहण इंतकाल दिनांक 17 मई 2016 में भूमि की एक मेढ़ को 54 कर्म दर्शाया गया है, जबकि मूल राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह 44 कर्म है, जो नियमों के विपरीत है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट उपमंडलाधिकारी (ना.) झंडूता अर्शिया शर्मा को सौंपी गई है।






-
राजस्व रिकॉर्ड, फील्ड बुक और पटवारी रिपोर्ट में हुई पुष्टि
दोनों नौतोड़ों की आपस में लगती सीमाएं सही ढंग से नहीं खा रही मेल
कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के लिए किए गए अधिग्रहण में सामने आई गड़बड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। उपमंडल झंडूता के मौजा धराड़सानी में वर्ष 1970 से 1975 के बीच स्वीकृत दो नौतोड़ इंतकालों में गंभीर ओवरलैपिंग (सीमा-आवरण) का मामला सामने आया है। राजस्व रिकॉर्ड, फील्ड बुक और पटवारी की रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों नौतोड़ों की आपस में लगती सीमाएं सही ढंग से मेल नहीं खा रहीं, जिससे न केवल रकबे में त्रुटि उजागर हुई है, बल्कि उस समय के राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार मौजा धराड़सानी में खसरा नंबर 419/201 से संबंधित पहली नौतोड़ इंतकाल नंबर 260, 28 जनवरी 1973, के तहत खसरा नंबर 492/419/201 में 1 बीघा 8 बिस्वा भूमि एक व्यक्ति को आवंटित की गई थी। यह नौतोड़ प्रदेश सरकार की ओर से मिसल नंबर 1023, 29 जनवरी 1970, के आदेशों के तहत स्वीकृत हुई थी। इसी तरह दूसरी नौतोड़ इंतकाल नंबर 306, 7 जून 1975, के अंतर्गत खसरा नंबर 493/419/201 में 3 बीघा 10 बिस्वा भूमि दूसरे व्यक्ति को प्रदान की गई। यह नौतोड़ उपायुक्त बिलासपुर के आदेश मिसल नंबर 422/69, दिनांक 16 नवंबर 1973, के आधार पर स्वीकृत बताई गई है। राजस्व रिकॉड का अवलोकन करने से यह तथ्य सामने आया कि दोनों नौतोड़ों की सीमाओं में दर्ज 44 कर्म की जगह 54 कर्म होना पाया गया। इससे इस मेढ़ का आपस में मिलान नहीं हो पा रहा है। जांच में पाया गया कि इंतकाल नंबर 260 की 54 कर्म वाली मेढ़, इंतकाल नंबर 306 की 44 कर्म वाली मेढ़ के ऊपर से गुजर रही है। यह स्थिति स्पष्ट रूप से ओवरलैपिंग को दर्शाती है। नियमों के अनुसार यदि बाद में स्वीकृत नौतोड़ में पहले से स्वीकृत भूमि के साथ ओवरलैपिंग पाई जाती है, तो रकबे में संशोधन कर नजरसानी रिपोर्ट बनाना अनिवार्य था। लेकिन इस मामले में बिना किसी गहन जांच के राजस्व रिकॉर्ड में अमल दरामद कर दिया गया। हैरानी का विषय यह है कि 10 कर्म का अंतर होने के बाद भी रकबा वही रहा। जबकि यह बढ़ना चाहिए था।
विज्ञापन

मामला उस समय और गंभीर हो गया जब हाल के वर्षों में उक्त भूमि का अधिग्रहण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के निर्माण के लिए किया गया। इसी दौरान यह अनियमितता हुई। इससे पहले यह रिकॉर्ड सही था। अगर यह सही नहीं हुआ तो आसपास की भूमि को लेकर विवाद बढ़ेगा। आरोप है कि अधिग्रहण के दौरान एनएचएआई से जुड़े राजस्व कर्मचारियों ने भी रिकॉर्ड का गहराई से अध्ययन नहीं किया और राजस्व दस्तावेजों में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियां की गईं। केंद्र सरकार के नाम दर्ज इंतकाल नंबर 799 के साथ संलग्न ततीमा जात और फील्ड बुक में भी कर्म माप को लेकर विसंगतियां पाई गई हैं। तहसीलदार झंडूता के आदेशों की अनुपालना में तैयार की गई पटवारी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि दोनों नौतोड़ इंतकालों में ओवरलैपिंग मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार अधिग्रहण इंतकाल दिनांक 17 मई 2016 में भूमि की एक मेढ़ को 54 कर्म दर्शाया गया है, जबकि मूल राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह 44 कर्म है, जो नियमों के विपरीत है। पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट उपमंडलाधिकारी (ना.) झंडूता अर्शिया शर्मा को सौंपी गई है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें