बिलासपुर। बिलासपुर में जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंताओं द्वारा पिछले पांच साल से लगातार विभिन्न पेयजल योजनाओं में आउट सोर्स आधार पर कार्यरत 35 कामगारों को बिना कारण से निकालकर उन्हें बेरोजगार किया जा रहा है।
ऑल हिमाचल पीडब्लयुडी-आईपीएच एंड कन्ट्रैक्च्युल वर्करज यूनियन के राज्य प्रधान सीता राम सैनी ने कहा कि सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाकर 35 कामगारों को निकालकर उन्हें बेरोजगार कर रहे हैं। जल शक्ति विभाग मंडल झंडूता के अंतर्गत विभिन्न पेयजल योजनाओं पर 20 कामगार पिछले 5 साल से सरकारी ठेकेदारों के पास पंप मोटर चलाने और टैंकों से पानी वितरण करने का काम रहे हैं। वर्तमान में यह कामगार शिमला क्लीनवे कंपनी के पास काम कर रहे थे। जल शक्ति विभाग मंडल बिलासुपर के अंतर्गत उठाऊ पेयजल योजना दली पर 15 कामगार पिछले 5 सालों से सरकारी ठेकेदारों के पास पंप मोटर चलाने और टैंको से पानी वितरण करने का काम रहे हंै। वर्तमान में यह कामगार शिमला क्लीनवे कंपनी के पास काम कर रहे थे।
विभाग और शिमला क्लीनवे कंपनी के अंतर्गत एग्रीमेंट के अनुसार इन कर्मचारियों से 6 घंटे ही काम लिया जा सकता था। परंतु विभाग इनसे 8 से 10 घंटे तक काम लेता है। पंप ऑपरेटर को 6 हजार और हेल्पर/बेलदार को 3500 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा था। जोकि अभी पिछले 5 माह से नहीं मिला है। राजकीय अधिसूचना के तहत इन कर्मचारियों को आज तक उपरोक्त प्रधान नियोक्ताओं ने न्यूनतम वेतन तक नहीं दिलवाया और ठेकेदारों से मिलकर कामगारों से अन्याय करते रहे। कहा कि अब शिमला क्लीनवे कंपनी का एग्रीमेंट समाप्त हो गया है तो अपने आप ही सीधे तौर पर कामगारों को काम पर बिना कारण से निकाला जा रहा है। कहा कि उन्होंने जल शक्ति विभाग के प्रमुख अभियंता को इस संबंध में पत्र भी लिखा है। यूनियन के राज्य उप प्रधान धर्म सिंह सहगल और महासचिव जगातार सिंह बैंस ने कहा कि यूनियन ने 30 जनवरी को संबंधित कंपनी, प्रधान नियोक्ता एवं श्रम अधिकारी श्रम एवं रोजगार विभाग जोन बिलासपुर को भी डिमांड नोटिस भेजा है।
परंतु श्रम अधिकारी बिलासपुर ने भी इस डिमांड नोटिस पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं की। सहगल ने कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर संबंधित विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो यूनियन आंदोलन करने के लिए तैयार रहेगी।