बिलासपुर। कोरोना संकट की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहे प्राईवेट बस ऑपरेटरों ने मांगों को लेकर आंदोलन की हुंकार भर दी है। मंगलवार को बिलासपुर जिला के बस ऑपरेटर अपनी गाडिय़ों के दस्तावेज और चाबियां प्रशासन को सौंपने पहुंच गए। हालांकि, प्रशासन ने चाबियां व दस्तावेज लेने से इंकार कर दिया। इस पर ऑपरेटरों ने सहायक आयुक्त सिद्धार्थ आचार्य को मांगपत्र सौंपा। उन्होंने दोटूक कहा है कि यदि 10 दिनों के भीतर सरकार ने उनकी मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया तो वे संघर्ष का बिगुल बजा देंगे।
अनिल मिंटू की अगुवाई में प्रशासन से मुलाकात करने पहुंचे बस ऑपरेटरों ने कहा कि उन्होंने बैंकों से लोन लेकर स्वरोजगार के उद्देश्य से यह व्यवसाय अपनाया था। अपने परिवारों का पालन-पोषण करने के साथ उन्होंने चालकों-परिचालकों को भी रोजगार दिया है, लेकिन कोरोना के खतरे की वजह से उनका कारोबार पिछले 4 माह से पूरी तरह ठप है। सरकार औद्योगिक घरानों, मजदूरों व अन्य वर्गों को राहत के लिए पैकेज दे रही है, लेकिन बस ऑपरेटरों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जा रहा है। रही सही कसर डीजल के बढ़ते दामों ने पूरी कर दी है।
ऑपरेटरों ने मांग की कि डीजल की बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस ली जाएं। बस ऑपरेटरों को लॉकडाउन की अवधि का आर्थिक पैकेज दिया जाए। पासिंग फीस व अन्य टैक्स अगले एक साल तक माफ किए जाएं। लॉकडाउन के लिहाज से इंश्योरेंस की अवधि बढ़ाई जाए। साथ ही अगली इंश्योरेंस का खर्च सरकार वहन करें।
लॉकडाउन के दौरान बैंक की किश्तों के साथ अगले एक साल तक ब्याज भी माफ किया जाए। इसके अलावा सरकार चालकों.परिचालकों का 50 लाख का बीमा भी करवाए। यदि 10 दिनों में मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो ऑपरेटर संघर्ष की राह पर चलने पर मजबूर होंगे। इससे पैदा होने वाली स्थिति के लिए सरकार व प्रशासन जिम्मेदार होंगे। इस मौके पर रमेश ठाकुर, अनिल, अमरजीत सेन, हरीश, अभिषेक, अजय भंडारी, देवराज, रवि, युवराज ढटवालिया, सुनील, मेहरचंद, चुनीलाल, रतनलाल, विजय पुरी, नवल, राजेश धीमान, बंटी, राजू व गुलजार समेत कई ऑपरेटर मौजूद थे।