संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। पेंशनर ज्वाइंट फ्रंट और पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन बिलासपुर ने वित्त विभाग के उस आदेश का कड़ा विरोध किया है, जिसमें वर्ष 2026-27 के लिए जुलाई में जीवित प्रमाणपत्र केवल जीवन प्रमाण एप या लोकमित्र केंद्र के माध्यम से ऑनलाइन जमा करने को अनिवार्य किया गया है।
संगठनों ने इसे अव्यावहारिक और पेंशनरों के हितों के खिलाफ बताते हुए सरकार से ऑफलाइन व्यवस्था भी जारी रखने की मांग की है। प्रदेशाध्यक्ष आत्माराम शर्मा, संयोजक हरीश शर्मा, महासचिव ठाकुर हुकम सिंह, संयुक्त सचिव लेख राम कौंडल और जिला प्रधान जगदीश दिनेश सहित अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान में कहा कि डिजिटल व्यवस्था का स्वागत किया जा सकता है, लेकिन इसे सभी पेंशनरों पर अनिवार्य करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि अधिकांश पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर कम पढ़े-लिखे हैं या उन्हें स्मार्टफोन और एप के माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करना नहीं आता।
उन्होंने कहा कि लोकमित्र केंद्रों पर अकसर सर्वर डाउन रहने के कारण लोगों को कई बार चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई क्षेत्रों में लोकमित्र केंद्र दूर स्थित होने से बुजुर्गों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केवल ऑनलाइन माध्यम से जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
पेंशनर संगठनों ने सरकार से मांग की है कि ऑनलाइन के साथ-साथ पहले की तरह कोषागार में जाकर ऑफलाइन जीवित प्रमाणपत्र जमा करने का विकल्प भी जारी रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द इस आदेश में संशोधन नहीं किया तो प्रदेशभर के पेंशनर और वरिष्ठ नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने को विवश होंगे।