एनटीपीसी विस्थापित और प्रभावित कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को आठवें दिन भी जारी रही। आठ दिनों तक संघर्ष के बाद भी एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से अभी तक वार्ता न होने से कर्मचारियों में भारी रोष है।
शनिवार को एनटीपीसी के इस रवैये से तंग आकर 200 कर्मचारियों ने महाप्रबंधक संजीव किशोर के कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। वहीं मजदूरों ने हरनोड़ा तक एनटीपीसी के खिलाफ शांतिपूर्वक रोष रैली भी निकाली।
मजदूरों से निपटने के लिए कंपनी ने पुख्ता प्रबंध कर रखे थे। सुरक्षा के दृष्टिगत हर ओर पुलिस और सीआईएसएफ के जवान मौजूद थे। मजदूर नेता और अधिवक्ता प्रवेश चंदेल कहा कि एनटीपीसी की तानाशाही से मजदूरों का शोषण हो रहा है।
श्रम रोजगार कानून की की सरेआम अवहेलना हो रही है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी कार्यालय बरमाणा में मजदूरों के धरने के चलते प्रबंधन ने पहले तो मजदूर प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया।
परंतु जब प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए कार्यालय के अंदर पहुंचा तो वहां एनटीपीसी का कोई भी अधिकारी बातचीत के लिए मौजूद नहीं था। वर्कर यूनियन प्रधान अनूप कुमार ने कहा कि मजदूरों की पहल के बाद प्रबंधन बातचीत के लिए तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि मजदूरों के बरमाणा पहुंचने के 2 घंटे बाद एजीएम एचआर प्रेमलता एनटीपीसी कार्यालय बरमाणा पहुंची तो सही लेकिन मजदूरों की मांगों के मुद्दे पर बात करने के लिए यह कहकर मना कर दिया कि उनके पास ये सब निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। वहीं यह भी साफ कर दिया कि एनटीपीसी से निकाले गए कर्मचारी की बहाली नहीं होगी।
प्रवेश चंदेल ने कहा कि एनटीपीसी गैर कानूनी तरीके से विस्थापित कर्मचारी को बाहर निकालती है और विस्थापित कर्मचारियों ने एनटीपीसी के जिन एचआर कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर रही है। साथ ही उन्होंने कहा कि मजदूरों ने जो शिकायत बरमाणा थाना में दर्ज करवाई है उस पर भी पुलिस विभाग ने सात दिनों में कोई कार्रवाई नहीं की है।
प्रवेश चंदेल ने कहा कि अगर एनटीपीसी विस्थापित कर्मचारियों के साथ ऐसा ही सौतेला व्यवहार करती रही तो कोलबांध परियोजना के समस्त विस्थापित और प्रभावित जल्द मजदूरों के साथ खड़े होंगे और एनटीपीसी को इस सौतेले रवैये के लिए न्यायालय तक ले जाएंगे। वहीं उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जायेगा तब तक सभी मजदूर एनटीपीसी महाप्रबंधक के कार्यालय के बाहर ही धरना पर रहेंगे।