फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: एनडीपीएस मामले में आरोपी को जमानत नहीं

विज्ञापन
विज्ञापन
कोर्ट से
विज्ञापन


6.805 किलो चरस बरामद केस में याचिका खारिज की
विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर की अदालत ने सुनाया आदेश

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। विशेष न्यायाधीश-II बिलासपुर की अदालत ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज एक गंभीर मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामला व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ की बरामदगी से जुड़ा है, ऐसे में एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत देने के कड़े प्रावधान लागू होते हैं और इस स्तर पर राहत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन

मामला थाना घुमारवीं में दर्ज एफआईआर से संबंधित है। पुलिस के अनुसार 26 नवंबर 2024 को मल्यावर लिंक रोड के पास एनएच-21 फोरलेन पर नाका लगाकर वाहनों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान मंडी की ओर से चंडीगढ़ जा रही एक स्विफ्ट डिजायर कार को रोका गया। कार में चालक सहित तीन लोग सवार थे। तलाशी के दौरान पुलिस ने वाहन में पीछे की सीट के पास रखे एक काले बैग को बरामद किया, जिसमें 11 पैकेट चरस पाए गए। इनका कुल वजन 6.805 किलोग्राम निकला। रिकॉर्ड के अनुसार जब वाहन को रोका गया तो सभी यात्री घबरा गए थे। पीछे बैठी महिला यात्री ने बैग को छिपाने की कोशिश भी की थी। पुलिस ने मौके पर दो स्वतंत्र गवाहों को भी शामिल किया और तलाशी की पूरी कार्रवाई उनके सामने की गई। आरोपी की ओर से जमानत याचिका में कहा गया कि उसे इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उसका कहना था कि वह केवल वाहन चालक था और बैग या उसमें रखी सामग्री से उसका कोई संबंध नहीं था। उसके अनुसार न तो उसकी जानकारी में कोई मादक पदार्थ था और न ही उसका कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष कब्जा। आरोपी ने यह भी कहा कि जांच पूरी हो चुकी है और अब उसे हिरासत में रखना उचित नहीं है। राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध करते हुए कहा गया कि बरामद चरस व्यावसायिक मात्रा में है, इसलिए यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि आरोपी वाहन चला रहा था और मादक पदार्थ की तस्करी में उसकी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता। सरकारी पक्ष ने यह भी दलील दी कि आरोपी को जमानत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकता है, फरार हो सकता है और दोबारा नशा कारोबार में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला व्यावसायिक मात्रा में मादक पदार्थ से जुड़ा है, इसलिए एनडीपीएस एक्ट की धारा 37 के तहत जमानत के लिए कठोर शर्तें लागू होती हैं। अदालत ने माना कि इस स्तर पर यह कहा जा सकता है कि आरोपी के खिलाफ संयुक्त रूप से परिवहन और आपराधिक साजिश का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत ने कहा कि आरोपी द्वारा दी गई दलीलें जैसे केवल ड्राइवर होना, बैग से कोई संबंध न होना और झूठा फंसाया जाना सभी ट्रायल के दौरान तय किए जाने वाले मुद्दे हैं। जमानत स्तर पर इन दलीलों के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें