किरतपुर-नेरचौक फोरलेन:
-हाईकोर्ट के आदेश के बाद हाईवे के किनारे की गई अवैध डंपिंग पर हुई थी कार्रवाई
-प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने चार जगह मलबा डंप करने के लिए लगाया था जुर्माना
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान वन भूमि पर हुए अवैध मलबा डंपिंग मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लगाया गया चार लाख रुपये का जुर्माना भर दिया है। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के बाद हुई थी। हालांकि यह जुर्माना फोरलेन निर्माण करने वाली कंपनियों पर लगा है, लेकिन इसकी पूरी जिम्मेदारी एनएचएआई की है इसलिए जुर्माना उनके माध्यम से ही भरा गया है।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने उक्त फोरलेन निर्माण के दौरान वन भूमि, गोबिंद सागर झील और उसके सहयोगी नदी नालों के किनारे हुए अवैध मलबा डंपिंग मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचाया है। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टनल नंबर दो से बलोह तक की गई मलबा डंपिंग पर कार्रवाई करते हुए एनएचएआई पर जुर्माना लगाया था। इसके बाद एनएचएआई ने यह जुर्माना भरा है। लेकिन अब मामले को हाईकोर्ट ले जाने वाली फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का कहना है कि अभी भी कई जगहों पर अवैध मलबा डंपिंग को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा ने कहा कि बलोह से पीछे के क्षेत्रों में तो कार्रवाई हो गई है, लेकिन अलसू से हरा बाग तक हुई अवैध मलबा डंपिंग पर कोई कदम नहीं उठाया गया है। कहा कि इस अवैध डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान हुआ है। समिति के सदस्यों ने सवाल उठाया है कि अलसू से हरा बाग तक हुई मलबा डंपिंग पर कार्रवाई कब होगी। वहीं कहा कि कंट्रोल बोर्ड द्वारा लगाया जुर्माना भी न के बराबर है। जबकि यहां बड़े स्तर पर अवैध डंपिंग हुई है। वहीं, यह जुर्माना भी उस समय लगा जब हाईवे को चले हुए एक साल हो गया। इसके अलावा बोर्ड ने कार्रवाई तब की जब शिकायत के बाद हाईकोर्ट ने आदेश दिए।
कोट
एनएचएआई ने बलोह तक की अवैध मलबा डंपिंग पर चार लाख का जुर्माना भर दिया है। विभाग ने अवैध मलबा डंपिंग करने के लिए एनएचएआई पर जुर्माना लगाया था।
पवन शर्मा, बोर्ड क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण कंट्रोल बिलासपुर