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Bilaspur News: एम्स में नवजातों को मिलेगा मां का सुरक्षित दूध, लगेगी विशेष मशीन

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समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले बच्चों को मिलेगा विशेष लाभ
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मां का दूध उपलब्ध नहीं होने पर दूसरी महिलाओं के दान किए दूध का भी हो सकेगा इस्तेमाल
दूध को पाश्चुरीकरण प्रक्रिया से गुजारकर हानिकारक जीवाणुओं को खत्म करने में मिलेगी मदद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर में नवजात शिशुओं को सुरक्षित मां का दूध उपलब्ध कराने की सुविधा विकसित की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में ऑटोमैटिक ह्यूमन मिल्क पाश्चराइजर मशीन स्थापित की जाएगी। इस मशीन के जरिये मां के दूध को विशेष पाश्चुरीकरण प्रक्रिया से गुजारा जाएगा। इससे दूध में मौजूद संभावित हानिकारक बैक्टीरिया और संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने में मदद मिलेगी। इस सुविधा का सबसे अधिक लाभ समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन वाले और गंभीर स्थिति में एनआईसीयू में भर्ती नवजात शिशुओं को मिलेगा। अस्पताल में कई बार ऐसे नवजात भर्ती होते हैं, जिनका जन्म गर्भावस्था की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले हो जाता है। इन बच्चों का वजन सामान्य से कम होता है और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में मां का दूध उनके लिए बेहद जरूरी होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व बच्चों के शारीरिक विकास में मदद करते हैं। साथ ही संक्रमण से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाते हैं। कई बार समय से पहले प्रसव, मां की बीमारी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों से बच्चे को पर्याप्त मात्रा में मां का दूध नहीं मिल पाता। कुछ मामलों में मां बच्चे को दूध पिलाने में असमर्थ होती है। ऐसी परिस्थितियों में दूसरी महिलाओं की ओर से दान किया गया दूध नवजात के पोषण का विकल्प बन सकता है। हालांकि, किसी दूसरी महिला का दूध सीधे बच्चे को नहीं दिया जाता। इसे पहले निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया से गुजारना जरूरी होता है।
निश्चित तापमान पर होगी पाश्चुरीकरण प्रक्रिया
एम्स में स्थापित होने वाली मशीन इसी प्रक्रिया में मदद करेगी। इसके माध्यम से दान किए गए मानव दूध को निश्चित तापमान पर निर्धारित समय तक गर्म कर पाश्चुरीकरण किया जाएगा। इससे दूध में मौजूद संभावित हानिकारक जीवाणुओं को खत्म करने में मदद मिलेगी। इसके बाद जरूरी जांच और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए दूध जरूरतमंद नवजातों को उपलब्ध कराया जा सकेगा। विशेष रूप से एनआईसीयू में भर्ती उन बच्चों को इसका लाभ मिलेगा, जिन्हें अपनी मां का पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा है।
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दो साल की वारंटी, आठ साल तक होगा रखरखाव
एम्स प्रशासन ने ऑटोमैटिक ह्यूमन मिल्क पाश्चराइजर मशीन की खरीद के लिए टेंडर जारी कर दिया है। इसके तहत एक मशीन खरीदी जाएगी। संबंधित कंपनी को मशीन की आपूर्ति, स्थापना और परीक्षण के साथ कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। टेंडर में उपकरण पर दो साल की वारंटी और इसके बाद आठ साल तक रखरखाव की व्यवस्था शामिल की गई है। मशीन स्थापित होने के बाद एम्स में ही मानव दूध के पाश्चुरीकरण की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को सुरक्षित डोनर मिल्क उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत होगी। दूध का इस्तेमाल बच्चों की चिकित्सकीय जरूरत और निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुसार किया जाएगा।
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