शारदीय नवरात्र विशेष
केवल देवी भक्ती नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति जागरण है नवरात्र का सार
जप, ध्यान और व्रत से बढ़ता है आत्मबल और मन पर नियंत्रण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। शारदीय नवरात्र रविवार से शुरू होने जा रहे हैं। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना के साथ यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का उत्सव है, बल्कि आत्म साधना, सामाजिक एकता और वैज्ञानिक जीवन-शैली का भी मार्गदर्शक माना जाता है।
वेद के ज्ञाता प्रोफेसर बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नवरात्र में प्रतिदिन दुर्गा के स्वरूप मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री मां की पूजा की जाती है। विद्वानों का कहना है कि ये नौ रूप स्थिरता, संयम, निर्भीकता, सृजन, मातृत्व, न्याय, भय मुक्ति, शुचिता और आत्मसिद्धि का संदेश देते हैं। नवरात्र का सार केवल देवी-भक्ति नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति जागरण है। जप, ध्यान और व्रत से मन पर नियंत्रण और आत्मबल बढ़ता है। सामूहिक आयोजन सामाजिक समरसता को मजबूती देते हैं, जबकि कन्या-पूजन नारी-सम्मान और समानता का प्रतीक है।
उपवास पाचन-तंत्र को विश्राम देकर प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है तो मंत्रोच्चारण और घंटानाद मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित कर तनाव कम करते हैं। पर्यावरणविदों का कहना है कि मिट्टी की मूर्तियों और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग प्रदूषण कम करने में सहायक है। नवरात्र शक्ति का पूजन ही नहीं, भीतर सुप्त चेतना को जगाने का पर्व है। श्रद्धा के साथ विज्ञान और पर्यावरणीय चेतना जुड़ जाए, तो यह परंपरा आधुनिक जीवन का मार्गदर्शन कर सकती है।
इनसेट
स्वास्थ्य और सुरक्षा पर दें ध्यान
चिकित्सकों ने उपवास से पहले स्वास्थ्य-जांच कराने, पंडालों में अग्नि-सुरक्षा और स्वच्छता सुनिश्चित करने तथा मूर्ति विसर्जन से पूर्व जल-शुद्धिकरण की व्यवस्था करने की अपील की है।