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नयना देवी में पहले दिन 242 श्रद्धालुओं ने टेका माथा

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श्री नयना देवी मंदिर में माता के दर्शन के लिए खड़े श्रद्धालु। - फोटो : BILASPUR
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श्री नयना देवी जी(बिलासपुर)। शक्ति पीठ श्री नयना देवी जी में साढ़े पांच माह बाद वीरवार को सुबह आठ बजे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर का मुख्य द्वार खोला गया। इससे पहले मंदिर अधिकारी हुस्न चंद, मुख्य पुजारी अमित कुमार, रमण कुमार और मुकेश कुमार ने विधिवत रूप से मां नयना की पूजा-अर्चना की।
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पहले दिन चंडीगढ़, लुधियाना और बद्दी सहित दूसरी जगहों के 242 श्रद्धालुओं ने मां के दर पर शीश नवाया। वहीं कौलां वाला टोबा बॉर्डर से बिना अनुमति आई करीब 15 गाड़ियों को पुलिस ने वापस भेजा।
सुबह के समय जैसे ही मां का द्वार खुला, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता रणधीर शर्मा ने मां नयना का आशीर्वाद लिया। दोपहर तक मंदिर में श्रद्धालुओं की आमद बहुत ही कम रही। दोपहर 2:00 बजे तक मात्र 183 श्रद्धालु जिनमें स्थानीय पुजारी भी शामिल हैं मंदिर पहुंचे। मंदिर न्यास ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गुफा के नजदीक मातृ सदन में स्क्रीनिंग काउंटर खोला है। दूसरा स्क्रीनिंग काउंटर बस स्टैंड पर क्लॉक रूम में खोला गया है। दोपहर 2:00 बजे तक बस स्टैंड के स्क्रीनिंग काउंटर में मात्र 7 लोगों की ही स्क्रीनिंग हुई। जबकि गुफा के नजदीक बनाए स्कैनिंग काउंटर में 173 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु की पहले स्क्रीनिंग की जाती है। उसके पश्चात उसका आधार कार्ड पूरा एड्रेस, नाम, उम्र इत्यादि दर्ज किया जाता है।
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पुजारी वर्ग ने स्क्रीनिंग करने पर रोष जताया। उन्होंने कहा कि जब मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद थे। तब स्थानीय पुजारियों को मंदिर में जाने की अनुमति दी गई थी। उस समय तो किसी भी पुजारी की स्क्रीनिंग नहीं होती थी। अब जबकि मंदिर के कपाट खोले हैं तो अब पुजारियों की स्क्रीनिंग क्यों की जा रही है। जहां तक नाम, पता और उम्र की बात है। मंदिर न्यास ने पुजारियों को स्थाई पास वितरित कर रखे हैं। ऐसे में स्क्रीनिंग करना औचित्य पूर्ण नहीं है। मंदिर खुलने के पहले दिन श्रद्धालुओं की तादाद में कमी रही। पुजारियों का कहना है कि श्राद्ध पक्ष भी इसका एक कारण हो सकता है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि श्राद्ध के बाद श्रद्धालुओं की तादाद बढ़ेगी।
पुजारियों की स्क्रीनिंग पर मंदिर न्यास के अध्यक्ष और एसडीएम श्री नयना देवी सुभाष गौतम से कहा कि स्क्रीनिंग तो होगी ही क्योंकि पूर्व में जब मंदिर के कपाट बंद थे तो पुजारियों को किसी भी बाहरी व्यक्ति से कोई कांटेक्ट नहीं था। इसलिए उनकी स्क्रीनिंग नहीं हो रही थी। अब जबकि बाहरी लोग आएंगे तो स्क्रीनिंग आवश्यक है। एक-दो दिन में सभी व्यवस्थाएं सुचारू हो जाएगी। पुजारियों के लिए अलग से स्क्रीनिंग काउंटर मंदिर के नजदीक खोल दिया जाएगा।
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