कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए शुरू किए गए ‘मुस्कान’ प्रोजेक्ट के सुखद परिणाम सामने आने लगे हैं। जिला प्रशासन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के बाद बिलासपुर का लिंग अनुपात पटरी पर आने लगा है। 1000 पुरुषों के मुकाबले 879 महिलाएं यहां वर्ष 2012-13 में थी, जो इस बार बढ़ गया है। वर्तमान में बिलासपुर का लिंग अनुपात 1000 पुरुषों के मुकाबले 986 हो गया है जो पिछले चार सालों में सबसे बेहतर है।
प्रशासनिक आंकड़ों को लें तो वर्ष 2015 की पहली तिमाही में लिंग अनुपात 947 पाया गया है। 2014 में इन्हीं तीन महीनों में यह 874, 2013 में 937 और 2012 में 911 था। लिंग अनुपात को सालाना भी लें तो बिलासपुर में पिछले चार साल में इस साल सबसे बेहतर लिंग अनुपात सामने आया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बिलासपुर में वर्ष 2012-13 में लिंगानुपात प्रति 1000 पुरुषों के मुकाबले 879 महिलाएं, वर्ष 2013-14 में 1000 पुरुषों के मुकाबले 901 महिलाएं, वर्ष 2014-15 में 1000 पुरुषों के मुकाबले 897 महिलाएं थीं।
जिला प्रशासन एवं बाल विकास विभाग के पिछले एक वर्षों में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए विभिन्न स्थानों में लगाए गए जागरूकता शिविरों व प्रयासों से वर्ष 2015-16 के जनवरी महीने तक लिंगानुपात में 1000 पुरुषों के मुकाबले 986 महिलाएं हैं जो कि पिछले चार सालों के आंकड़ों में सबसे बेहतर है।
उपायुक्त मानसी सहाय ठाकुर ने बताया कि बेटी समाज के साथ-साथ परिवार सास-ससुर की सेवा में अहम भूमिका निभाती है। उनके अनुसार महिलाओं के साथ हो रही ज्यादती को महिलाओं के समक्ष रखने की जरूरत है। भ्रूण हत्या क्या है और कैसे होती है, इस पर आधारित साइलेंट स्क्रीम नामक वीडियो भी बनाया है जिसे विभिन्न सेमिनार में महिलाओं को दिखाया गया। इसके अलावा जन्म लेने वाली बेटियों के नाम पर प्रशासन की ओर से आरडी भी करवाई जा रही है।
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