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लंपी रोग से संक्रमित पशु का उबालकर पी सकते हैं दूध

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झंडूता में लंपी रोग के सैंपल भरते हुए केंद्रीय टीम। संवाद - फोटो : BILASPUR
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बिलासपुर। लंपी वायरस से मवेशियों में फैल रहे त्वचा रोग को लेकर केंद्रीय टीम ने बिलासपुर जिला का दौरा कर पशुपालकों को रोग के नियंत्रण और उपचार की जानकारी दी। साथ सैंपल कर एकत्रित किए।
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सैंपल को जांच के लिए हिसार स्थित लैब में भेजा जाएगा। इसके अलावा विशेषज्ञों ने बताया कि संक्रमित के पशु के दूध को उबाल कर पीया जा सकता है। विशेषज्ञों ने एक घर पर संक्रमित पशु के दूध की चाय बनवा कर पिया और दूध न पीने की भ्रांति को दूर किया।
केंद्र सरकार की टीम में शामिल विशेषज्ञ डॉ. विक्रम सिंह, डॉ. गौरव शर्मा और डॉ. रमेश कुमार, वेटरनेरी अस्पताल पालमपुर के विशेषज्ञ डॉ. राजेश चहोता, डॉ. अजय कटोच और डॉ. पाटिल की एक टीम ने जिले के सदर, झंडूता, घुमारवीं और गेहड़वीं में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने लंपी वायरस से पीड़ित मवेशियों के पशुपालकों व स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा की और रोग के नियंत्रण व उपचार के लिए उचित व्यवस्था करने और रोग को फैलने से रोकने व नियंत्रण के उपाय बताए।
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टीम के सदस्यों ने कहा कि मवेशियों की पशुशाला में स्वच्छता बनाए रखना और संक्रमित मवेशियों से अन्य मवेशियों को तुरंत अलग करना जरूरी है। पशुशाला में मच्छरों, मक्खियों आदि को रोकने के लिए उपयुक्त कीटनाशकों का छिड़काव शामिल किया जाना चाहिए। टीम की अगुवाई कर रहे डॉ. विक्रम ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर राज्य में दौरे किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों की ओर से प्रभावित पशुपालकों को विभिन्न प्रकार की जानकारियां देकर जागरूक किया जा रहा है। मंगलवार को टीम ऊना जिला का दौरा करेगी।
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