स्वारघाट नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र जल्द होगा शुरू, 27 पंचायत नशा निवारण समितियां होंगी सक्रिय
स्कूल एडॉप्शन कार्यक्रम के तहत अधिकारी करेंगे विद्यार्थियों से संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। जिला प्रशासन ने नशा तस्करी और नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। जिले में एनडीपीएस मामलों में फंसे नौ सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। युवाओं में तेजी से फैल रहे ओरल निकोटिन पाउच की बिक्री, प्रचार और ऑनलाइन डिलीवरी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का फैसला लिया गया है। ये अहम निर्णय उपायुक्त राहुल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय एनकॉर्ड समिति की मासिक समीक्षा बैठक में लिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि नशे के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को पूरी सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, आबकारी और सामाजिक न्याय सहित सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। बैठक में एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में संलिप्त नौ सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागाध्यक्षों को लापरवाही न बरतने और नियमों के अनुसार शीघ्र अनुशासनात्मक कार्रवाई पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने जोर दिया कि सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से समाज में यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि नशे से जुड़े मामलों में किसी को बख्शा नहीं जाएगा। युवाओं में बढ़ रहे ओरल निकोटिन पाउच को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उपायुक्त ने कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के इनका निर्माण, भंडारण, बिक्री, प्रचार और वितरण पूरी तरह अवैध है। उन्होंने सभी थोक व खुदरा विक्रेताओं, ई-कॉमर्स मंचों, त्वरित वितरण सेवाओं, ऑनलाइन मंचों और वितरण एजेंसियों को इनकी बिक्री व डिलीवरी तत्काल बंद करने के निर्देश दिए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्वारघाट में स्थापित किए जा रहे नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की प्रगति की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को सभी औपचारिकताएं जल्द पूरी कर केंद्र को शीघ्र क्रियाशील बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल नशा तस्करी रोकना ही पर्याप्त नहीं है। नशे की गिरफ्त में आए युवाओं को उपचार देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। जिले में पंचायत स्तर पर गठित 27 नशा निवारण समितियों को सक्रिय करने के निर्देश भी दिए गए। उपायुक्त ने समितियों से नियमित बैठकें आयोजित करने और गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने को कहा। उन्हें नशा तस्करी से संबंधित सूचनाएं प्रशासन व पुलिस तक पहुंचाने के लिए भी निर्देशित किया गया। बैठक में पुलिस अधीक्षक अभिषेक धीमान, एसडीएम राज कुमार सहित स्वास्थ्य, शिक्षा, आबकारी एवं कराधान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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स्कूल एडॉप्शन कार्यक्रम से जागरूकता
युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जिला प्रशासन स्कूल एडॉप्शन कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करेगा। इस कार्यक्रम के तहत जिला स्तर के अधिकारी स्कूलों को गोद लेंगे। वे नियमित रूप से विद्यार्थियों के साथ संवाद करेंगे। छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्परिणामों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही, उन्हें कॅरिअर काउंसिलिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने में मदद करना है। यह पहल छात्रों को सही मार्गदर्शन प्रदान कर उन्हें नशे से दूर रखने में सहायक होगी।
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नशा मुक्त भारत अभियान की प्रगति
बैठक में नशा मुक्त भारत अभियान की प्रगति पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि बिलासपुर जिले में अब तक एक लाख से अधिक बच्चों, युवाओं और स्थानीय नागरिकों को इस अभियान से जोड़ा जा चुका है। उपायुक्त ने इस अभियान को जन आंदोलन बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यह अभियान नशे के खिलाफ व्यापक जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पहल से समाज में नशे के प्रति नकारात्मक धारणा मजबूत हो रही है।