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ई-टेंडर को लेकर सहमत नहीं मत्स्य सभाएं

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बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में ई-टेंडर को लेकर सहकारी सभाओं ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंगलवार को घाघस में मत्स्य विभाग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मत्स्य सहकारी सभाओं के सदस्यों ने साफ कर दिया है कि अगर ई-टेंडर करने वाली कंपनी का सीधे उनके साथ एमओयू करेंगे तब वह ई-टेंडर लेने वाली कंपनी के साथ काम करेंगे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो मत्स्य सहकारी सभाएं किसी भी हाल में ई-टेंडर नहीं होने देगी, चाहे उन्हें इसके लिए कोर्ट का ही सहारा क्यों न लेना पड़े।
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हालांकि मंगलवार को हुई बैठक में मत्स्य विभाग के अधिकारी मत्स्य सहकारी सभाओं के पदाधिकारियों के गुस्से को शांत करने में सफल रहे। मत्स्य सहकारी सभाओं के सदस्यों ने साफ कर दिया है जब तक उन्हें नियमों की कॉपी नहीं दिखा देते, वह ई-टेंडर को स्वीकार नहीं करेंगे। वहीं विभाग के अधिकारी मौके पर मत्स्य सहकारी सभाओं के पदाधिकारियों को नियम और शर्तों की कॉपी नहीं दिखा पाए। बैठक में मौजूद अधिकारी मत्स्य सहकारी सभाओं को केवल आश्वासन ही दे पाए।
मत्स्य सहकारी सभाओं में बिलासपुर मत्स्य सहकारी सभा के प्रधान रूप लाल राणा और कैहलूर मत्स्य सहकारी के मुख्य सलाहकार मुनिर अख्तर लाली ने बताया कि अगर ई-टेंडर वाली कंपनी का सहकारी सभाओं के साथ एमओयू होता है तो उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है।
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वहीं ज्योर मत्स्य सहकारी सभा के प्रधान बुद्धि सिंह, जबलू सोसायटी के प्रधान श्रवण, जगातखाना के प्रधान शेर सिंह, धौलाधार के प्रधान चरण दास, बलघाड़ के प्रधान बाबू राम, गाह बाड़ी सोसायटी के प्रधान सुखबंत सिंह, बेला बाहुडी सभा के प्रधान सुरेश कुमार का कहना है कि उन्हें ई-टेंडर की शर्त मंजूर नहीं है। पहले से ही सोसायटी खुली बोली करती है और आगे भी वहीं करेगी।
मत्स्य विभाग के निदेशक सतपाल मेहता का कहना है कि विभाग का प्रयास है कि बिलासपुर से लेकर ऊना तक सभी मत्स्य सभाओं को एक समान मछली का रेट मिले। ई-टेंडर होने से सभाओं और मछुआरों को सीधा लाभ होगा।
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