रामलीला में ताड़का से युद्घ करते प्रभु श्रीराम।
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बिलासपुर। शहर के डियारा सेक्टर में चल रही रामलीला के दूसरे दिन पहले दृश्य में भगवान श्री राम जन्मोत्सव दिखाया गया। अयोध्या नरेश दशरथ के दरबार में जब परिचारिका राजकुमार के जन्म होने का समाचार लेकर आती है तो चारों ओर खुशी का माहौल बन जाता है। राजा दशरथ प्रसन्नता से अयोध्या में उत्सव मनाने की घोषणा करते हैं।
दूसरे दृश्य में महाराज दशरथ के दरबार में राक्षसों के उपद्रव से परेशान विश्वामित्र क्रोधित होकर आते हैं और राजा को भला-बुरा कहते हैं। दशरथ विश्वामित्र के गुस्से को शांत कर उनके साथ सेना भेजने का आदेश देते हैं लेकिन वह राम और लक्ष्मण को अपने साथ वन में लेने का हठ करते हैं। राम और लक्ष्मण को राक्षसों के आतंक से मुक्ति दिलाने के लिए अपने साथ ले जाते हैं। तीसरे दृश्य में विश्वामित्र की सेवा में लीन दोनों भ्राता इन राक्षसों के बारे में ज्ञान प्राप्त करते हैं। इसी बीच ताड़का की भयंकर चीखें सुनाई देती हैं। तभी राम और लक्ष्मण ने ताड़का के साथ-साथ उनके बेटे सुबाहू और अन्य सहयोगियों का वध कर दिया। मारीच भागने में सफल रहा।
इसी बीच विश्वामित्र को मिथिला नरेश राजा जनक की पुत्री के स्वयंवर का समाचार और निमंत्रण मिलता है। विश्वामित्र दोनों भाइयों को अपने साथ मिथिलापुरी जाने के लिए प्रस्थान करते हैं। रास्ते में उन्हें एक सुनसान स्थान पर विक्षिप्त शिला मिलती है। दूसरे दिन प्रभु राम का किरदार नवीन सोनी, लक्ष्मण का किरदार रिशु शर्मा, दशरथ का किरदार गोपाल हंस, विश्वामित्र का किरदार राजेंद्र चंदेल और नितिन तांडी ने ताड़का का किरदार निभाया।