बकरोआ पंचायत का मामला, बीडीओ ने निदेशक से पूछा जांच और परीक्षण का खर्च
कैमरों की जांच का पूरा खर्च उठाएगा शिकायतकर्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। ग्राम पंचायत बकरोआ में लगे सीसीटीवी कैमरों के खराब होने की शिकायत के बाद खंड विकास अधिकारी घुमारवीं ने निदेशक, राज्य सरकार फारेंसिक प्रयोगशाला जुन्गा शिमला को पत्र लिखकर कैमरों की जांच और परीक्षण के खर्च का मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया है।
पत्र में खंड विकास अधिकारी ने बताया कि शिकायतकर्ता की ओर से भेजे गए पत्र की जांच में पाया गया कि ग्राम पंचायत बकरोआ में लगे सीसीटीवी कैमरे की हार्ड ड्राइव खराब है। शिकायतकर्ता ने हार्ड ड्राइव का परीक्षण सरकारी लैब में करवाने की इच्छा जताई है और इसके खर्च को स्वयं वहन करने को तैयार हैं। साल 2023 में पंचायत में करीब 60 हजार रुपये की लागत से चार सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। हालांकि, बिना इस्तेमाल के ही ये कैमरे खराब पाए गए, जब शिकायतकर्ता ने साल 2024 में कैमरों के फुटेज की मांग की। पंचायत की ओर से करवाई गई जांच में यह पाया गया कि कैमरे विद्युत सप्लाई के कम वोल्टेज के कारण खराब हुए हैं। वहीं, ग्राम पंचायत बकरोआ के बाहर भगेड़ चौक में लगे सरकारी और गैर-सरकारी कैमरे कई सालों से सही काम कर रहे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि पंचायत में लगे कैमरे विद्युत की कम वोल्टेज से ही खराब हुए होते, तो बाहर लगे कैमरे भी प्रभावित होने चाहिए थे।
शिकायतकर्ता ने स्पष्ट तौर पर आग्रह किया है कि जांच में यह भी देखा जाए कि कैमरे वास्तव में खराब थे या नहीं। इसके अलावा यह परीक्षण किया जाए कि कैमरे किस कारण से खराब हुए—कम वोल्टेज, आसमानी बिजली (लाइटनिंग) या अन्य किसी कारण से। खंड विकास अधिकारी ने पत्र में कहा है कि इस परीक्षण से वर्तमान और भविष्य में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और इसे जनहित में सुरक्षित रखा जा सके।