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Bilaspur News: चलो चांद का किरदार अपना लें, दाग अपने पास रखें और रोशनी फैला दें

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-बिलासपुर लेखक संघ की मासिक साहित्यिक संगोष्ठी
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संवाद न्यूज एजेंसी

बिलासपुर। बिलासपुर लेखक संघ की ओर से आयोजित मासिक साहित्यिक संगोष्ठी इस बार हटवाड़ क्षेत्र की बम्म पंचायत के सभागार में हुई। इस अवसर पर पंचायत प्रधान मनीष शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि बद्रीनाथ, देशराज ठाकुर विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रवींद्र कुमार ठाकुर ने की।


संगोष्ठी को दो सत्रों में विभाजित किया गया। पहले सत्र में ' इस क्षेत्र के जीवन विकासवाद' विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। इस सत्र में डॉ. रवींद्र कुमार ठाकुर, डॉ. अनेक राम सांख्यान, एनआर हितैषी और अनूप मस्ताना ने अपने विचार व्यक्त किए। चर्चा में इस क्षेत्र की खाली पड़ी ज़मीन को उपयोगी बनाने पर भी विचार किया गया और करण चंदेल ने शिवा प्रोजेक्ट के तहत फलदार पौधे लगाने की योजना पर अपने विचार प्रस्तुत किए। पंचायत प्रधान मनीष शर्मा और स्थानीय लोग इस प्रस्ताव से सहमत हुए। दूसरे सत्र में काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इसमें क्षेत्रीय कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। इस सत्र का संचालन रक्षा ठाकुर ने किया। कार्यक्रम में पंचायत सचिव बलदेव राज, पंचायत सदस्य, ग्रामीण भी मौजूद रहे। काव्य गोष्ठी की शुरुआत रूप शर्मा ने इंदिरा गांधी को समर्पित कविता से की। इसके बाद डॉ. अनेक राम सांख्यान ने मेरे श्याम बसे मोरे नैनन में, मन ढूंढ रहा दिन-रैनन में कविता प्रस्तुत की। इसके बाद प्रीति मधु शर्मा ने यह संसार है बस मेला, कौन यहां पर रहने वाला कविता सुनाई, जो उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित कर गई।
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इसके बाद जसवंत सिंह चंदेल ने नव पति-पत्नी की बातें कविता प्रस्तुत की। इसके बाद रविंद्र साथी ने खांदी कोलटू कलवाड़ी कविता प्रस्तुत की। जय महलवाल ने बुरा हाल करी दितया सीर खड्डा रा कविता प्रस्तुत की। इसके बाद रवींद्र कमल ने सबको बराबर तोलता हूं, बंद आंखें खोलता हूं कविता प्रस्तुत की। डॉ. रवींद्र कुमार ठाकुर ने सीर खड्ड प्यारीये तू रात दिन बगदी कविता प्रस्तुत की। इसके बाद रक्षा ठाकुर ने चलो चांद का किरदार अपना लें, दाग अपने पास रखें और रोशनी फैला दें कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम के समापन पर बृजपाल लखनपाल ने लोक गीत इसा छीन्जा जो जाना जरूर प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तित्वों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया। इस आयोजन ने न केवल साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि समाज के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार मंथन किया।
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